
Indore News : युवक को हिरासत से छोड़ने की कीमत पहले 1 लाख रुपए तय हुई, लेकिन जब फरियादी ने कहा कि, इतनी रकम एक साथ नहीं दे पाएंगे तो रिश्वत की रकम भी बढ़ गई। आरोप है कि, दो किस्तों में भुगतान की बात पर आरोपी पुलिसवालों ने 20 हजार रुपए 'एक्स्ट्रा चार्ज' के नाम पर जोड़ दिए। इस तरह एक लाख की मांग बढ़कर 1 लाख 20 हजार रुपए हो गई। रिश्वतखोरी का ये अजीबो गरीब मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आया है।
आपको बता दें कि, लोकायुक्त ने क्राइम ब्रांच के तत्कालीन टीआई संजय श्रीवास्तव, आरक्षक विकास, ड्राइवर अभय सिंह और दीपक पटेल के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। लोकायुक्त जांच में सामने आया कि, महिला के बेटे को क्राइम ब्रांच ने हिरासत में लिया था। उसे पूछताछ के लिए कार्यालय में बैठाया गया। इधर, बेटे को छोड़ने की फरियाद करते हुए जब महिला ने संबंधित पुलिसकर्मियों से बात की तो उन्होंने छोड़ने के एवज में 1 लाख रिश्वत की डिमांड कर दी। इसपर महिला ने कहा, उसके पास तुरंत इतनी नकद रकम नहीं है, वो ये रकम दो बार में दे सकेगी। आरोप है कि, इसी दौरान रकम बढ़ाकर 1.20 लाख कर दी गई।
रकम के लेन-देन के लिए अभय सिंह के माध्यम से दीपक पटेल से संपर्क कराया गया। इसके बाद फरियादी से 50 हजार रुपए दीपक पटेल के यूपीआई/बैंक खाते में ट्रांसफर करवाए। बची हुई 70 हजार रुपए की रकम अभय सिंह ने नकद ली। लोकायुक्त ने जांच में इन लेन-देन और आरोपियों की भूमिका को आधार बनाया है।
मांग से रकम पहुंचाने तक में भूमिका जांच में अभय सिंह की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि, वो फरियादी और अन्य आरोपियों के बीच संपर्क था और रिश्वत की मांग से लेकर रकम पहुंचने तक पूरे घटनाक्रम में शामिल रहा। इसी आधार पर उसे भी आरोपी बनाया गया है। लोकायुक्त अब मामले में जुड़े अन्य लोगों, बातचीत और रुपए के लेन-देन से संबंधित साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लोकायुक्त की कार्रवाई में पुलिसकर्मियों के रिश्वत लेने का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले करीब डेढ़ साल में लोकायुक्त टीम 8 पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ चुकी है। इनमें इंदौर और महू पुलिस के कर्मी भी शामिल हैं। लगातार सामने आ रहे मामलों से पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।