सिख समाज की बैठक में प्रमुख लोगों ने दर्ज कराई आपत्ति
इंदौर. सिख समाज में सहजधारियों को वोट देने के अधिकार को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। हाई कोर्ट के आदेश पर फर्म्स एंड सोसायटी ने श्री गुरुसिंघ सभा को निर्देश दिए हैं कि वे सहजधारियों को सदस्य बनाकर सूची तैयार करें। दूसरी ओर, समाज की बैठक में अधिकांश ने इस आपत्ति लेते हुए प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। इससे सोमवार को सभा ने जवाब पेश नहीं किया।
श्री गुरुसिंघ सभा के बायलॉज में सहजधारियों को सदस्य बनाने और वोट देने का अधिकार है, लेकिन चुनाव को लेकर तैयार मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं किया गया। लगातार शिकायत के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ तो सहजधारियों ने याचिका लगा दी। इस पर कोर्ट ने 15 दिन में फर्म्स एंड सोसायटी को निराकरण के निर्देश दिए। सोमवार को पक्ष रखने के लिए सभा को पत्र लिखा गया था, लेकिन लिखित जवाब पेश नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि फर्म्स एंड सोसायटी ने सभा के जिम्मेदारों को साफ कर दिया है कि सहजधारियों के नाम जोड़कर मतदाता सूची तैयार करें।
इसके चलते रविवार को समाज की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें शहर के सभी गुरुद्वारों के प्रमुख व सचिव के साथ प्रमुख संस्थाओं के सदस्यों को बुलाया गया था। बैठक में अधिकांश ने सहजधारियों को सदस्य बनाने पर आपत्ति दर्ज कराई। कहा गया कि अकाल तख्त के निर्देश हैं कि उन्हें वोटर नहीं बनाया जा सकता। तख्त के आदेश से अलग नहीं जा सकते। साधारण सभा कर यह नियम हटाया जाए। इधर, फर्म्स एंड सोसायटी का स्पष्ट कहना है कि चुनाव प्रक्रिया जारी है और हाई कोर्ट के निर्देश हैं। अब बदलाव नहीं किया जा सकता है। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ डबल बेंच में जा सकते हैं।
ऐसे निकल सकता है रास्ता
हाई कोर्ट ने फर्म्स एंड सोसायटी को 15 दिन में सहजधारियों की शिकायत का निराकरण कर मतदाता सूची तैयार करने काे कहा है। श्री गुरुसिंघ सभा व चुनाव अधिकारी नहीं चाहते हैं कि सहजधारी सदस्य बनें। ऐसे में रजिस्ट्रार को अधिकार है कि वे प्रशासक नियुक्त कर मतदाता सूची तैयार कराकर चुनाव की नए सिरे से घोषणा कर दें।
सोमवार को फर्म्स एंड सोसायटी में पक्ष नहीं रखा है। कानूनी जानकारों से चर्चा कर सभा अपनी स्थिति जल्द ही स्पष्ट करेगी। इसे लेकर रविवार को बैठक हुई थी, जिसमें सहजधारी सहित कई मुद्दों पर समाज ने अपनी राय दी।
रिंकू भाटिया, अध्यक्ष, श्री गुरुसिंघ सभा