इंदौर

युद्ध से बड़ा संकट: 30 हजार रोजगार खत्म, 25 हजार कर्मचारियों की आधी हुई ‘सैलरी’

iran-america war: इंदौर-पीथमपुर के करीब 5000 से ज्यादा उद्योग कच्चे माल के लिए 60 प्रतिशत तक मिडिल ईस्ट देशों पर निर्भर हैं।

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Apr 08, 2026
iran-america war प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

iran-america war: हजारों किलोमीटर दूर अमरीका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब मध्यप्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब पीथमपुर की आर्थिक धड़कनों को धीमा कर दिया है, जो युद्ध टीवी स्क्रीन पर दिखाई दे रहा था, उसका असर अब फैक्ट्री की मशीनों, मजदूरों की रोजी-रोटी और उद्योगों के भविष्य पर साफ दिखाई देने लगा है। औद्योगिक नगरी पीथमपुर, जहां करीब एक लाख से अधिक मजदूर काम करते हैं, आज अभूतपूर्व संकट के दौर से गुजर रही है। कच्चे माल की कमी, गैस सप्लाई में कटौती, लॉजिस्टिक लागत में भारी वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला के टूटने से उद्योगों की कमर टूट गई है।

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5000 से ज्यादा उद्योगों पर संकट

इंदौर-पीथमपुर के करीब 5000 से ज्यादा उद्योग कच्चे माल के लिए 60 प्रतिशत तक मिडिल ईस्ट देशों पर निर्भर हैं। बहरीन, कतर और सऊदी अरब से आने वाले पेट्रोकेमिकल्स और बल्क ड्रग्स की सप्लाई बाधित हो गई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के का समुद्री मार्ग जोखिम भरे हो गए हैं, जिससे आयात-निर्यात प्रभावित हुआ है। चीन और यूरोप से आने वाली सप्लाई भी प्रभावित हो रही है, वहीं इंश्योरेंस मिलना भी मुश्किल हो गया है।

लॉजिस्टिक खर्च 5 गुना, निर्यात पर भारी असर

निर्यात क्षेत्र में भी हालात खराब हैं। कंटेनर भाड़ा पहले की तुलना में 5 गुना तक बढ़ गया है। इंदौर से हर महीने हजारों कंटेनर कांडला और जेएनपीटी पोर्ट भेजे जाते हैं, लेकिन अब शिपिंग देरी और बढ़ी लागत के कारण विदेशी ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं। पीथमपुर व इंदौर अकेले प्रदेश के कुल निर्यात में 40-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, ऐसे में यह संकट पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।

ईंधन संकट और नकद भुगतान का दबाव

एलपीजी की कमी के चलते उद्योगों को पीएनजी पर निर्भर होना पड़ रहा है। गैस कंपनियों ने उधार की सुविधा बंद कर दी है और अब नकद भुगतान की शर्त लागू कर दी गई है। इससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी पर भारी दबाव पड़ रहा है।

तेजी से रोजगार खत्म, परिवारों पर संकट

सबसे ज्यादा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा है। कच्चे माल के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं। पीवीसी, पाइप, बोतल और पैकेजिंग से जुड़े कई यूनिट बंद होने की कगार पर हैं। स्थिति यह है कि करीब 20 हजार मजदूरों का रोजगार सीधे खत्म हो चुका है, जबकि 10 हजार से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं।

इसके अलावा 25 हजार कर्मचारियों की सैलरी आधी कर दी गई है, जिससे मजदूर वर्ग आर्थिक संकट में फंस गया है। जो फैक्ट्रियां पहले दो से तीन शिफ्ट में चलती थीं, अब वहां सिर्फ एक शिफ्ट में काम हो रहा है। करीब 100 से अधिक यूनिट गैस आधारित हैं, लेकिन गैस की सप्लाई 50 प्रतिशत तक कम हो गई है। - डॉ. गौतम कोठारी, अध्यक्ष पीथमपुर औद्योगिक संगठन

फार्मा सेक्टर पर डबल मार, दवाओं पर असर की आशंका

कच्चे माल की कमी और गैस संकट के चलते इंजेक्शन और अन्य दवाओं का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पैरासिटामॉल पाउडर सहित कई रसायनों के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। आने वाले 10-12 दिनों में दवाओं की सप्लाई पर असर पडऩे की आशंका है। हालांकि फिलहाल आम जनता पर बोझ न पड़े, इसलिए कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। - राजीव सिंघल, महासचिव एआइओसीडी

बड़ा संकट….

यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर फैक्ट्री शटडाउन हो सकते हैं। इसका सीधा असर लाखों मजदूरों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। - अतुल यादव, उद्योगपति पीथमपुर

आकड़ें बयां कर रहे हालात

30,000 से अधिक रोजगार खत्म, बढ़ सकती है संख्या
25,000 कर्मचारियों की सैलरी आधी कर दी गई
5,000 से ज्यादा उद्योग हो गए प्रभावित
20-30% कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि

लॉजिस्टिक लागत 5 गुना तक बढ़ी

60% कच्चा माल मिडिल ईस्ट पर है निर्भर
10-15% फैक्ट्रियों ने शिफ्ट घटाई
पैरासिटामॉल 290 से बढ़कर 360 रुपए प्रति किलो हुई
ग्लिसरीन 64% तक महंगी

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Published on:
08 Apr 2026 12:53 pm
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