Iran War Impact: युद्ध की आंच से महंगा होगा आशियाना, गैस संकट से कांच-टाइल्स के दाम उछले, निर्माण की लागत बढ़ेगी... प्लास्टिक दाने के भाव दोगुना से ज्यादा बढ़े....फर्नीचर के रेट में आएगा उबाल।
Iran War Impact: ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट भारत समेत दुनियाभर में देखने को मिल रहे हैं। उद्योगों पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है। गैस की किल्लत भी कई उद्योगों को प्रभावित कर रही है। सबसे ज्यादा असर मकान निर्माण पर होगा, कांच महंगे हो रहे हैं, टाइल्स के रेट में भी उबाल आ रहा है। मध्यप्रदेश की कई टाइल्स फैक्टरियां बंद हो गई हैं
उद्योग युद्ध के साइड इफेक्ट(Iran War Impact) से सहमा हुआ है जिसके कारण महंगाई का असर आने वाले दिनों में साफ नजर आएगा। एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्री मप्र (एआइएमपी) के मुताबिक, गैस की किल्लत, पेट्रोकेमिकल की कमी का असर उद्योगों पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कांच के काम में गैस का इस्तेमाल ज्यादा होता है, गैस की किल्लत है, ब्लैक में खरीदना पड़ रहा है, इसलिए कांच के दाम बढ़ेगे। मकान निर्माण में कांच का इस्तेमाल अहम है।
मोरबी से टाइल्स आती है, लेकिन वहां की फैक्टरियां बंद हो गई हैं और कई बंद होने की कगार पर है। इंदौर व आसपास के जिलों में पूरा माल मोरबी से आता है। कम उत्पादन होने से टाइल्स के दाम बढ़ेगे, ऐसे में मकान बनाना महंगा हो जाएगा। लोगों को मार्बल, ग्रेनाइट की ओर आना होगा जो वैसे ही महंगा पड़ता है।
कॉपर मेटल व पीवीसी भी महंगा हो रहा है, जिसका असर केबल पर आ रहा है। एआइएमपी के अध्यक्ष योगेश मेहता ने बताया, केबल का जो बंडल पहले 500 रुपए में मिल जाता था उसके रेट बढ़कर 2500-3000 तक पहुंच रहे हैं।
केमिकल इंडस्ट्री में अमोनिया बैस पर काम होता है जो गैस से बनते हैं। गल्फ कंट्री से सीधा इनका संपर्क है। सोडा ऐस, कास्टिक सोड़ा महंगा हो रहा है जिसका असर घरों में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट, साबुन, बर्तन धोने के पावडर आदि पर पड़ेगा।
पेट्रोकेमिकल से बनने वाला जो प्लास्टिक दाना पहले 80 रुपए किलो में मिलता था वह अब 170 रुपए किलो तक पहुंच गया है। इससे फुटवेयर महंगे हो रहे हैं। प्लास्टिक से बनने वाले फर्नीचर महंगे हो जाएंगे।