
Vyapam scam: हाईकोर्ट की एक सुनवाई में ऐसा मोड़ आया जिसने सबको चौंका दिया। अदालत में दाखिल एक याचिका पर अचानक उठे सवालों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। जजों की सख्त टिप्पणी और नाराजगी ने माहौल गरमा दिया। दरअसल, फर्जी लोगों से परीक्षा दिलवाने वाले और व्यापमं घोटाले के मुख्य आरोपी डॉ. जगदीश सगर और उनकी पत्नी सुनीता सगर को हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है।
सगर दंपती ने एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में अपनी अपील लंबित होने की बात छिपाते हुए याचिका दायर की थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान यह बात सामने आने पर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने नाराजगी जताई। (mp news)
डॉ. जगदीश सगर और उनकी पत्नी की संपत्तियां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीज की थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई शुरू होते ही सगर दंपती के वकील ने याचिका वापस लेने की गुजारिश की। इस दौरान ईडी की ओर से पेश हुए वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस याचिका में उनकी संपत्ति अटैच करने को चुनौती दी गई थी, लेकिन याचिका में यह बात छिपाई गई कि इस अटैचमेंट के खिलाफ उनकी अपील ट्रिब्यूनल में लंबित है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए जवाब तलब किया तो सगर दंपती के वकील ने बताया कि याचिका किसी अन्य वकील ने ड्रॉफ्ट कर हाईकोर्ट में दायर की थी, इसलिए इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई।
कोर्ट ने अपने आदेश में भी लिखा है कि दूसरे वकील द्वारा पीटिशन ड्रॉफ्ट करने की दलील अपील के पेंडिंग होने के बारे में न बताने पर विचार करने का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने सगर दंपती के व्यवहार को गलत बताते हुए टिप्पणी में इसकी बुराई भी की है। कोर्ट ने लिखा है कि याचिका वापस लेने की याचना की गई है, इसलिए हम याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई प्रोसिडिंग शुरू नहीं कर रहे हैं। कोर्ट ने उनकी याचिका को वापस मानकर खारिज कर दिया। (mp news)