MP BJP Political Appointments: एमपी में जल्द होंगी राजनीतिक नियुक्तियां। दावेदार और उनके आकाओं ने भोपाल से दिल्ली तक जमाई बिसात...।
MP BJP: सरकार के निगम मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियां जल्द होने वाली है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) अध्यक्ष के लिए हरिनारायण यादव का लगभग तय माना जा रहा है। ये नाम आते ही सियासी संग्राम शुरू हो गया है। विरोधी खेमे ने मैदान पकड़ कर आपत्ति दर्ज कराना शुरू कर दी है तो दावेदार और उनके आकाओं ने भी भोपाल-दिल्ली एक कर दिए हैं। बवाल को देखते आइडीए की घोषणा को होल्ड किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार प्रयास कर रहे हैं कि सरकार में राजनीतिक पदों पर नियुक्तियां(MP BJP Political Appointments) हो जाएं जिसको लेकर लगातार संगठन से समन्वय कर नाम निकाले जा रहे हैं। सत्ता और संगठन की लंबी कसरत के बाद में फेहरिस्त तैयार हो गई है। अब दिल्ली से मंजूरी ली जाना शेष है जिसके पहले सूची लीक हो गई। कई नाम सामने आ गए हैं जिसमें इंदौर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष के लिए हरिनारायण यादव का नाम तय किया गया जो कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के खास हैं।
नाम के आते ही बवाल शुरू हो गया है, क्योंकि सुदर्शन गुप्ता के नाम का लगभग सभी विधायकों के साथ कई नेताओं ने समर्थन किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर भी चाहते हैं कि गुप्ता को उपकृत किया जाए। कमलनाथ सरकार को गिराने के दौरान सिंधिया समर्थक विधायकों को बेंगलूरु ले जाने और संभालने की जिम्मेदारी उन्हें दी थी। इसके अलावा वे संगठन के हर पैमाने पर फिट बैठे। अनुभवी होने के साथ सबको साथ में लेने की कला आती है।
गुप्ता के अलावा कमलेश शर्मा और मुकेश राजावत का नाम भी बहुत मजबूती से था। शर्मा को संघ की लॉबी पसंद करती है जिसके चलते नाम सुर्खियों में आया था। राजावत के लिए एबीवीपी की टीम सक्रिय हो गई है तो वे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के यहां भी कुछ समय से हाजिरी भरा रहे हैं। हरिनारायण के नाम पर कमलेश व मुकेश की मदद करने वालों ने मैदान पकड़ लिया है। इसको देखते हुए ये माना जा रहा है कि आइडीए में नियुक्ति को होल्ड किया जा सकता है।
हरिनारायण का नाम आते ही कई नेता घबरा गए हैं, क्योंकि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इंदौर पर एक तरफा कब्जा हो जाएगा। महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और जिला अध्यक्ष श्रवण चावड़ा भी उनके ही खेमे से जुड़े हैं। ऐसे आइडीए अध्यक्ष भी उनकी पसंद से बन जाएगा तो उनकी सभी तरफ से सुनवाई बंद हो जाएगी या खुद को बनाए रखने के लिए कैलाश से समझौता करना पड़ेगा।