इस सत्र में 21 वर्ष तक की उम्र के छात्रों को मिलेगा योजना का लाभ, पहले से पढऩे वालों के लिए उम्र सीमा 24 वर्ष
इंदौर. कोविड संक्रमण के चलते कई परिवारों के सामने आजीवीका का संकट खड़ा हुआ। कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जिनके कमाऊ सदस्य की संक्रमण से मौत हो गई। कोविड के कारण माता-पिता को खो चुके बच्चों को संबल प्रदान करने के लिए इन्हें इस सत्र में कॉलेजों में मुफ्त दाखिले दिए जाएंगे। 21 साल और इससे कम उम्र वाले वे छात्र जो सरकारी या अनुदान प्राप्त कॉलेजों में पढ़ेगे, उन्हें फीस नहीं चुकाना होगी।
ऑनलाइन काउंसलिंग में शासन की विभिन्न योजनाओं के साथ इस बार मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल कल्याण योजना भी शामिल की गई है। इसका लाभ उन आवेदकों को मिलेगा, जिन्होंने 1 मार्च से 30 जून 2021 के बीच अपने माता-पिता को खो दिया है। इसके साथ ही उन उम्मीदवारों को भी इसका पात्र माना जाएगा जिनके माता या पिता की मौत पहले ही हो चुकी है। पहले से कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को भी योजना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। वे छात्र जो पहले से स्नातक कोर्स में हैं और उनकी उम्र २४ वर्ष या इससे कम है, वे भी इस सत्र से इस योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे।
इन सभी विद्यार्थियों का न सिर्फ शिक्षण शुल्क बल्कि कॉशन शुल्क, प्रवेश शुल्क, परीक्षा शुल्क, मैस शुल्क भी शासन प्रदान करेगा। निजी कॉलेजों के लिए भी इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार की ओर से अधिकतम १५ हजार रुपए फीस का भुगतान किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक प्रो. सुरेश सिलावट ने बताया, होनहारों की पढ़ाई में आर्थिक तंगी बाधा न बने इसलिए कोविड के कारण अनाथ हुए प्रदेश के बच्चों को सरकारी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में नि:शुल्क पढ़ाने का निर्णय लिया है।