इंदौर। जिले की चर्चित विधानसभाओं में से एक है देपालपुर। यहां पहला विधानसभा चुनाव 1957 में लड़ा गया था। इस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार को जीत मिली। हालांकि इसके बाद कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा के उम्मीदवार चुनाव जीतते रहे। यही इस विधानसभा की खासियत है।
यहां के मतदाताओं ने 30 साल में 6 विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस में से किसी को भी रिपीट नहीं किया है, मतलब हर 5 साल बाद यहां जीतने वाली पार्टी बदल जाती है। देपालपुर सीट अभी कांग्रेस के पास है। 1980 से ही देपालपुर में यह एक बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस के पास जाती है, हालांकि 1990 और 1993 में भाजपा के निर्भय सिंह पटेल ने लगातार 2 बार जीत हासिल की थी। 2003 और 2013 में ही मनोज पटेल चुने गए थे।
2023 के चुनाव मैदान में कांग्रेस से विशाल पटेल उम्मीदवार हैं तो वहीं भाजपा ने मनोज पटेल पर फिर भरोसा जताया है। ऐसे में इस बार यह देखने लायक होगा कि 30 साल से जारी मतदाताओं की ‘परंपरा’ जारी रहती है या फिर टूट जाएगी।
चुनाव विजेता दल
1957 सज्जन सिंह विश्नर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1962 बापूसिंह रामसिंह सोशलिस्ट पार्टी
1967 बी साबू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1972 रामचंद्र अग्रवाल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977 रतन पाटोदी जनता पार्टी
1980 निर्भय सिंह पटेल भारतीय जनता पार्टी
1985 रामेश्वर पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1990 निर्भय सिंह पटेल भारतीय जनता पार्टी
1993 निर्भय सिंह पटेल भारतीय जनता पार्टी
1998 जगदीश पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2003 मनोज पटेल भारतीय जनता पार्टी
2008 सत्यनारायण पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
2013 मनोज पटेल भारतीय जनता पार्टी
2018 विशाल पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
सामाजिक-आर्थिक ताना बाना
इस ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक कलोता और ठाकुर समाज है। पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में यही दोनों समाज पार्टियों के समीकरण तय करते आए हैं। एक बार कलोता और ठाकुर समाज ने भाजपा के मनोज पर भरोसा जताया तो वहीं 2018 में दोनों ही समाज ने मिलकर कांग्रेस के विशाल पर भरोसा जताया। इस बार भी दोनों ही उम्मीदवार पटेल हैं।
2018 के चुनाव में 12 उम्मीदवार: 2018 के में विशाल को 94,918 और मनोज को 85,937 वोट मिले थे। चुनाव में आम आदमी पार्टी, बीएसपी समेत कुल 12 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी।