MP News: कभी-कभी जिंदगी इतनी लंबी प्रतीक्षा लिख देती है कि उम्मीद भी थकने लगती है, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो टूटते नहीं बस समय के साथ कहीं ठहर जाते हैं। कुछ दिन पहले अचानक सूचना मिली कि, नागपुर के पास एक मानसिक अस्पताल में आपके पिता हैं। यह खबर ओमप्रकाश के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। जिस पिता को उन्होंने वर्षों पहले खो दिया था, अब वही फिर से मिलने वाले थे।
MP News: कभी-कभी जिंदगी इतनी लंबी प्रतीक्षा लिख देती है कि उम्मीद भी थकने लगती है, लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जो टूटते नहीं बस समय के साथ कहीं ठहर जाते हैं। इंदौर जिले के महू क्षेत्र के सिमरोल के ग्वालू निवासी विश्राम उर्फ इशराम पचाया की कहानी भी ऐसी ही है, 18 साल पहले घर से निकले और फिर कभी लौटकर नहीं आए। परिवार ने हर जगह तलाश की, हर दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। धीरे-धीरे उम्मीदें टूटती गईं, यहां तक कि इंतजार करते-करते पत्नी ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन बेटे ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा और आखिरकार वही उम्मीद जीत गई।
ओमप्रकाश बताते हैं कि उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और 2008-09 के आसपास घर छोडकऱ चले गए थे। सालों तक तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 2014 में मां का भी निधन हो गया, वह अपने जीवनसाथी के लौटने का इंतजार करते-करते चली गईं। आज जब पिता के मिलने की खबर आई, तो खुशी के साथ एक कसक भी है, काश मां यह दिन देख पातीं।
कुछ दिन पहले अचानक सूचना मिली कि, नागपुर के पास एक मानसिक अस्पताल में आपके पिता हैं। यह खबर ओमप्रकाश के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। जिस पिता को उन्होंने वर्षों पहले खो दिया था, अब वही फिर से मिलने वाले थे।
स्वास्थ्य विभाग की पहल पर जब वीडियो कॉल के जरिए बेटे की अपने पिता से बात कराई गई, तो शब्द कम पड़ गए, आंखें बोलने लगीं। टूटी-फूटी आवाज में पिता ने अपने गांव का नाम लिया, रिश्तों की पहचान जताई और स्क्रीन के उस पार खड़ा बेटा भावुक(Emotional Father Son Reunion) होकर बस उन्हें निहारता रह गया।
अस्पताल प्रबंधन ने औपचारिकताओं के चलते दो दिन बाद आने के लिए कहा है। ओमप्रकाश अब हर पल गिन रहे हैं, उस क्षण के लिए, जब वे अपने पिता को गले लगाएंगे। उन्हें देख पाएंगे। लेकिन एक कसक रह गई कि काश मां भी उन्हें देख पातीं।