इंदौर। बदलती लाइफ स्टाइल में लोग सेहत का ध्यान नहीं रख पाते हैं, जिससे कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। बच्चे व वृद्ध इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक 3 से 5 साल के बीच बच्चे काफी सक्रिय रहते हैं। ऐसे में उनके पोषण आहार का ध्यान रखना जरूरी होता है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी में पदस्थ आहार व पोषण विशेषज्ञ डॉ. संगीता मालू ने बताया कि न्यूट्रीशियन डाइट होनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेड, कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स डाइट से संतुलित आहार मिलता है। आज हम इन चीजों का ध्यान नहीं रखते हैं । फास्ट फूड से एसीडिटी, डिप्रेशन जैसी समस्याएं आती हैं।
इनका सेवन जरूरी
● दूध व उससे बनी सामग्री।
● चावल, गेहूं, जौ, बाजरा, रोटी, खिचड़ी, पास्ता।
● हरी सब्जी, आलू, गाजर, मूली का सेवन करें।
● सीजनल फल, नट्स आदि का सेवन करें।
गर्भवतियों व प्रसूताओं के लिए आहार
रसोई घर प्रभारी राजकुमार पांडे ने बताया कि गर्भवतियों व प्रसूताओं को पोषण आहार में गुड़, मेवे के लड्डू, फल, दूध, चाय, नाश्ता व दो टाइम भोजन दिया जाता है। इसके लिए दिन और समय निर्धारित है। नाश्ते में चाय-बिस्किट, लंच में चावल, एक कटोरी दाल, एक कटोरी सब्जी के साथ चार रोटी और सलाद तो डिनर में चावल की जगह दलिया दिया जाता है।