MP News: इंदौर से मुंबई के लिए 309 किमी की इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन को 18 हजार 36 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली थी। नई रेल लाइन से 188 किमी कम होंगे। 5 घंटे तक समय बचेगा लेकिन कब..? इंदौर शहर के लिए अहम इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन प्रोजेक्ट की गति मप्र में धीमी है।
MP News:इंदौर शहर के लिए अहम इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन(Indore Manmad Rail Line) प्रोजेक्ट की गति मप्र में धीमी है। चार जिलों से इस प्रोजेक्ट के तहत डाली जाने वाली लाइन के लिए नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी भूमि अधिग्रहण शुरू नहीं हो सका है, जबकि महाराष्ट्र में किसानों को जमीनों की राशि मिलनी शुरू हो गई है। दोनों राज्यों के 13 जिलों की भूमि अधिग्रहित होनी है।
इंदौर से मुंबई के लिए 309 किमी की इंदौर-मनमाड़ नई रेल लाइन को 18 हजार 36 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली थी। इस लाइन से इंदौर न केवल मुंबई और साउथ से जुड़ेगा, बल्कि औद्योगिक कनेक्टिविटी भी मिलेगी। पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत वर्षों से अटकी इस योजना पर काम शुरू हुआ है, लेकिन प्रदेश में काम धीमा है।
इंदौर-मनमाड़ रेल प्रोजेक्ट(Indore Manmad Rail Line) की कवायद वर्षों से चल रही है। 2023 में टोकन राशि 2 करोड़ रुपए मिली थी। मप्र के हिस्से में डीपीआर-सर्वे का काम किया गया। काम जारी रखने के लिए 2024 के बजट में एक हजार रुपए टोकन राशि दी थी। अब 18 हजार 36 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। अभी इंदौर से देवास, उज्जैन, रतलाम, थांदला, दाहोद, गोधरा, वडोदरा होते हुए मुंबई जाना पड़ता है। यह 828 किमी है। नई रेल लाइन से 188 किमी कम होंगे। 5 घंटे तक समय बचेगा।
रेल लाइन से सबसे ज्यादा फायदा मप्र को मिलेगा। 309 किमी में 170.56 किमी का हिस्सा मप्र का है। इसमें प्रदेश की कुल 905 हेक्टेयर जमीन निजी है। मप्र में बनने वाले 18 स्टेशन में महू, कैलोद, कमदपुर, झाड़ी बरोदा, सराय तालाब, नीमगढ़, चिक्तायाबड़, ग्यासपुरखेड़ी, कोठड़ा, जरवाह, अजंदी, बघाड़ी, कुसमारी, जुलवानिया, सलीकलां, वनिहार, बवादड़ और मालवा स्टेशन है।
खेड़ी (इस्तमुरार), चेनपुरा, कामदपुर, खुदालपुरा, कुराड़ा खेड़ी, अहिल्यापुर, नांदेड़, जामली, केलोद, बेरछा, खेड़ी, गवली पलास्या, आशापुर, मालेंडी, कोदरिया, बोरखेड़ी, चोरड़िया, न्यू गुराड़िया, महू कैंट (डॉ. आंबेडकर नगर)। मनमाड़-इंदौर रेलवे संघर्ष समिति के मनोज मराठे ने बताया कि महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण का मुआवजा मिलने लगा है। धुलिया से नरडाणा तक काम शुरू कर दिया है। प्रदेश के धार, बड़वानी, खरगोन और इंदौर में अधिग्रहण की गति धीमी है।