
इंदौर . (कुणाल किशोर) जंजीरावाला चौराहे से मालवा मिल चौराहे (रोशन सिंह भंडारी मार्ग) तक चौड़ीकरण के नाम पर एक बार फिर एक भाजपा नेता समेत आधा दर्जन रसूखदारों के नुकसान को बचाने के लिए सेंट्रल लाइन में हेरफेर कर दी गई। प्रथम चरण में 85 फीट सड़क चौड़ी करने के लिए निगम ने पहले उक्त रसूखदारों की दुकानें बचाई, अब फिर से इन दुकानों पर कृपा बरसाने के लिए सेंट्रल लाइन ही बदल दी। सेंट्रल लाइन में इस बार बदलाव से फिर सड़क के दोनों ओर की बजाय एक ओर ही मकान तोडऩे का निशान लगाया। जिम्मेदारों के इस रवैये से जहां पहले ही लोगों की 15 फीट चौड़ी दुकानें 4 फीट में सिमट गई, अब नए निशान से पूरी दुकान ही टूटने की कगार पर आ गई।
ऐसा है मामला
वर्ष 2014 में उक्त सड़क की चौड़ीकरण का काम शुरू हुआ। योजना के मुताबिक सड़क 104 फीट तक चौड़ी होनी थी। निगम ने पहले चरण में चौड़ीकरण के लिए 85 फीट चौड़ाई तय की। सड़क के दोनों ओर 42.5-42.5 फीट के दायरे में आने वाली दुकानों पर निगम के तोडऩे के लिए निशान लगाए। भाजपा मंडलाध्यक्ष नंदकिशोर पहाडि़या की 20 दुकानें भी आ रही थी। इसके साथ ही डॉ. पंकज भंडारी के घर का आधा हिस्सा भी इस जद में था, लेकिन इन्हें बख्श दिया गया।
सेंट्रल लाइन
टूट की जद में आने वाली दुकानों को देख भाजपा मंडलाध्यक्ष पहाडि़या के प्रभाव में निगम ने सेंट्रल लाइन को बदल दिया गया। इससे निगम के निशान भाजपा मंडलाध्यक्ष पहाडि़या की दुकानों की ओर से खिसक कर सड़क के दूसरी ओर गोमा की फेल व सरकारी स्कूल क्रमांक-7 की ओर खिसक गए। भाजपा नेता की दुकानें तो बचीं, साथ ही इस कतार में आने वाली सभी दुकानें व इमारतें भी बच गईं। सड़क के दूसरी ओर बरसों से रोजी-रोटी जुटा रहे दुकान संचालकों पर निगम ने गाज गिराई। उनकी 15-20 फीट चौड़ी दुकानें तोड़ी और महज 4-5 चौड़ी ही दुकानें रह गईं।
दुकान पर निशान
2 साल बाद एक बार फिर चौड़ीकरण का जिन्न बाहर निकला। इस बार फिर जिम्मेदारों ने सेंट्रल लाइन में बदलाव किया। फरवरी में मकानों को तोडऩे के लिए निगम ने जो निशान लगाए, इसमें उन्होंने हद ही पार कर दी। इस बार भी तोडऩे के लिए उन्होंने रसूखदारों के दुकान-मकान बचा लिए।
फिर भी छोड़ा
जंजीरावाला चौराहे से मालवा मिल तक ग्रीन बेल्ट की 20 फीट जिस जमीन पर बरसों से रसूखदारों ने कब्जा किया, उसे भी बख्श दिया गया। शुरुआत नारायण कोठी के पास से हुई। फिर कांग्रेस नेता की बिल्डिंग, एक शराब कारोबारी की बिल्डिंग और नगर निगम के एक चर्चित ठेकेदार के प्लॉट को भी छोड़ दिया गया। रहवासियों की मानें तो पूर्व पार्षद व भाजपा मंडलाध्यक्ष नंदकिशोर पहाडि़या की दुकानें भी इसी ग्रीन बेल्ट पर हैं, लेकिन उन्हें बचाने के फेर में दूसरी ओर बची-खुची दुकानों को तोडऩे के लिए निशान लगाए गए।