
MP Government departments: एमपी में सरकारी विभागों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। नियमों में समयसमय पर तबादलों का प्रावधान होने के बावजूद कई कर्मचारी वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं। इससे न केवल पारदर्शिता प्रभावित होती है, बल्कि सरकारी राजस्व और प्रशासनिक व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है। एक ही स्थान पर लंबे समय तक पदस्थ रहने वाले कर्मचारियों के स्थानीय स्तर पर मजबूत नेटवर्क बन जाते हैं, जिससे कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगते हैं।
मध्यप्रदेश की तबादला नीति के तहत किसी भी अधिकारी-कर्मचारी का तीन वर्ष से अधिक एक ही स्थान पर पदस्थ रहना नियमों के विपरीत माना जाता है, लेकिन धार जिले में स्थिति अलग है। यहां कई अधिकारी- कर्मचारी 10 से 15 वर्ष, जबकि कुछ मामलों में 25 वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। स्थानांतरण सत्र शुरू होते ही एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया है कि आखिर वर्षों से जमे अधिकारियों पर तबादला नीति का असर कब दिखाई देगा।
हर वर्ष तबादला सत्र के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले होते हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे हैं जो हर बार सूची से बाहर रह जाते हैं। इससे कर्मचारियों के बीच भी असंतोष देखने को मिलता है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसे अधिकारियों को संरक्षण कौन दे रहा है और किन आधारों पर उन्हें वर्षों तक एक ही स्थान पर बनाए रखा जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रदेशभर में समान नीति लागू है तो धार में उसका पालन क्यों नहीं हो रहा और क्या प्रभावशाली पदस्थापना के चलते नियमों की अनदेखी की जा रही है।
स्थिति केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं है। जिले के कई कार्यालयों में लिपिकीय अमला भी 10 से 20 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत है। शिक्षा विभाग, जनजातीय ,वन विभाग, स्वास्थ विभाग, कलेक्ट्रेट, कृषि, उद्यानिकी, एसपी-डीपीसी कार्यालय, जिला पंचायत, महिला बाल विकास पीएचई, नगर पालिका, एनडीवीए, हाउसिंग बोर्ड, पीडब्ल्यूडी, पशु विभाग सहित कई विभागों में अधिकारी 10 से 25 वर्षों या उससे अधिक समय से पदस्थ हैं।
अगर किसी विभाग में ऐसा है तो मैं दिखवाता हूं। कौन से कर्मचारी कितने साल से एक जगह पदस्थ हैं। राजीव रंजन मीणा, कलेक्टर धार