
Mhow news: रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने वाली बहन से अक्सर उसकी रक्षा का वचन जुड़ा होता है। लेकिन बदलते समय में बहनें भी परिवार की ढाल बनकर सामने आ रही हैं। जरूरत पडऩे पर वे माता-पिता की जिम्मेदारी उठा रही हैं, आर्थिक संकट में अपनी बचत लगा रही हैं और मुश्किल समय में पूरे परिवार को संभाल रही हैं। महू के लुनियापुरा निवासी कौशल परिवार की प्रतिभा कौशल की कहानी भी इसी बदलती तस्वीर की मिसाल है। उन्होंने संकट के समय सिर्फ भाई का साथ नहीं दिया, बल्कि मां के इलाज के लिए अपनी वर्षों की जमा पूंजी तक लगा दी।
सरकारी अध्यापिका प्रतिभा शासकीय उमावि कमदपुर में पदस्थ हैं। छोटा भाई दीपक निजी कंपनी में नौकरी करता है। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। वर्ष 2020 में कोविड महामारी के दौरान मां राधा कौशल की तबीयत गंभीर हो गई। अस्पतालों में इलाज और बेड की व्यवस्था के लिए परिवार को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
एक तरफ मां की बिगड़ती हालत थी तो दूसरी ओर उपचार के लिए बढ़ता खर्च परिवार के सामने बड़ी चुनौती बन गया था। दीपक बताते हैं कि उस समय निजी नौकरी की आय से घर का खर्च चलाना भी मुश्किल था। ऐसे में प्रतिभा ने भाई को अकेला नहीं पडऩे दिया। उन्होंने इलाज के लिए अपने आभूषण गिरवी रख दिए और अपनी बचत से बनाई एफडी भी तुड़वा दी। इससे जुटी रकम से मां का उपचार शुरू हो सका। उनके इस फैसले ने परिवार को न सिर्फ आर्थिक सहारा दिया, बल्कि मुश्किल समय में हिम्मत भी दी।
प्रतिभा के जीवन में भी कठिन दौर आया। वर्ष 2010 में इंदौर में उनका विवाह हुआ, लेकिन परिस्थितियों के कारण वैवाहिक संबंध आगे नहीं चल सके और तलाक हो गया। इस व्यक्तिगत संघर्ष के बाद भी उन्होंने खुद को कमजोर नहीं पडऩे दिया। वह वापस अपने परिवार के साथ खड़ी हुईं और धीरे-धीरे माता-पिता व भाई की जिम्मेदारियां संभालने लगीं। आज करीब 80 वर्षीय पिता सोहनलाल कौशल और करीब 70 वर्षीय मां राधा के साथ वह छोटे भाई दीपक के लिए भी मजबूत सहारा हैं। प्रतिभा ने साबित किया कि बहन सिर्फ राखी बांधकर रक्षा का इंतजार करने वाली नहीं होती, वह जरूरत पडऩे पर पूरे परिवार की ढाल बन सकती है।
इस रक्षाबंधन पर उनकी कहानी उस रिश्ते की ताकत का संदेश है, जिसमें प्यार सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि जरूरत पडऩे पर अपने हिस्से का सुख और भविष्य तक परिवार के लिए समर्पित करने में दिखाई देता है।