
Indore High Court: पति से अलग रह रही गर्भवती महिला को हाईकोर्ट ने आखिरकार गर्भ समाप्त करने की अनुमति दे दी है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने महिला द्वारा दायर याचिका का निराकरण करते हुए टिप्पणी की कि जब महिला वैवाहिक विवाद और गंभीर मतभेदों के कारण गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती, तो उसकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने एमवायएच को गर्भपात के लिए जल्द चिकित्सकीय प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं।
एक महिला ने अपने पति से अलगाव के बीच गर्भपात की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। महिला ने कोर्ट को बताया था कि उसकी शादी धार जिले के धरमपुरी थाना क्षेत्र के युवक से हुई थी और वह वर्तमान में गर्भवती है।
पति ने उसके साथ मारपीट की, जिसके बाद 5 मई को उसने पति के खिलाफ धार के धरमपुरी थाने में आपराधिक मामला दर्ज कराया। वह पति से अलग इंदौर में रह रही है। उसने तलाक लेने का निर्णय लिया है और वह गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गर्भस्थ शिशु को बचाने के कई प्रयास किए। दंपती के बीच समझौते की संभावनाएं तलाशने के लिए कई बार मध्यस्थता कराई। पहले हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी के जरिए काउंसलिंग कराई, लेकिन वह सफल नहीं हुई।
इसके बाद कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थ वकील ने दो अलग-अलग दौर की बातचीत कराई, लेकिन दोनों प्रयास विफल रहे। पिछली सुनवाई में महिला के वकील ने अदालत को बताया था कि दोनों पक्ष के परिजन भी उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं। इस आधार पर अदालत ने एक और अवसर देते हुए सुनवाई स्थगित की थी। मंगलवार को कोर्ट को बताया गया कि मध्यस्थता का यह प्रयास भी असफल रहा और महिला अब किसी भी स्थिति में पति के साथ नहीं रहना चाहती।
सुनवाई के दौरान पति की ओर से पेश वकील ने इसका विरोध किया। कोर्ट में कहा कि वह सभी शर्तें मानने को तैयार है, गर्भस्थ शिशु को बचा लिया जाए। वह दोनों दो साल से संतान प्राप्ति के लिए मंदिरों में प्रार्थना कर रहे थे। सरकार की ओर से कोर्ट में एमवायएच की मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि महिला की गर्भावस्था 16 सप्ताह की है और सुरक्षित गर्भपात किया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने कहा, रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से स्पष्ट है कि पति-पत्नी के बीच गंभीर मतभेद हैं और महिला ने पति के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज कराया है। ऐसी स्थिति में यदि महिला गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती तो उसकी इच्छा को महत्व दिया जाना चाहिए। यदि भविष्य में दंपती के संबंध और खराब होते हैं तो गर्भावस्था जारी रखने के परिणाम मुख्य रूप से महिला को ही भुगतने पड़ेंगे।
हाईकोर्ट ने एमवायएच अधीक्षक को महिला का नियमानुसार गर्भ समापन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही महिला को 18 जून को सुबह 10 बजे अस्पताल में उपस्थित रहने को कहा है। राज्य शासन को भी निर्देश दिए हैं कि उपचार के दौरान महिला को कोई असुविधा न हो।