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नैक की अनिश्चितता के बीच रिसर्च की नई पहचान, डीएवीवी के पांच साल में 57 पेटेंट

इंदौर

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Newsdesk

Aug 06, 2026

datia news

datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

इंदौर। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इस समय राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नैक) की नई मूल्यांकन प्रणाली को लेकर देशभर के विश्वविद्यालय असमंजस की स्थिति में हैं। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) भी इसी दौर से गुजर रहा है। लगभगडेढ़ वर्ष से नई नैक मान्यता का इंतजार है। फैकल्टी की कमी जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। इसके बाद भी इन परिस्थितियों के बीच विश्वविद्यालय ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय रफ्तार दिखाई है। पिछले 5 वर्षों में 57 पेटेंट प्रकाशित होना और हर साल सैकड़ों शोध पत्र राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित होना इस बात को दर्शाता है कि डीएवीवी ने गुणवत्ता आधारित शोध को अपनी प्राथमिकता बनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता का आकलन सिर्फ परीक्षा परिणाम या प्लेसमेंट से नहीं, बल्कि शोध, नवाचार, पेटेंट और उद्योगों से सहयोग जैसे मानकों से भी किया जा रहा है। डीएवीवी ने पिछले कुछ वर्षों में इसी दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षण विभागों में विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, फार्मेसी, जैव विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे क्षेत्रों में शोध गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं।
विश्वविद्यालय रिसर्च के प्रकाशित होने के आंकड़ों से प्रदर्शित होता है कि प्रति वर्ष कईं रिसर्च पेपर प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध मैगजीन में प्रकाशित हो रहे हैं। इसका सीधा असर विश्वविद्यालय की अकादमिक पहचान और शोध क्षमता पर दिखाई दे रहा है।
डेढ़ वर्ष में 15-18 पेटेंट हुए प्रकाशित
डीएवीवी की सबसे अधिक उपलब्धि पेटेंट के क्षेत्र में मिली है। पिछले 5 वर्षों में विश्वविद्यालय के 57 पेटेंट प्रकाशित हुए हैं। इनमें से 15 से 18 पेटेंट पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान प्रकाशित हुए, जो शोध की गति में आए बदलाव को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पेटेंट सिर्फ शोध का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह किसी नई तकनीक, उत्पाद या समाधान की मौलिकता का प्रमाण भी होता है। राज्य विश्वविद्यालयों में इतनी संख्या में पेटेंट प्रकाशित होना डीएवीवी की मजबूत शोध संस्कृति का संकेत माना जा रहा है।
रिसर्च के लिए कर रहे प्रोत्साहित
विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से शोध गतिविधियों को संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। फैकल्टी को रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार करने, पेटेंट दाखिल करने और उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्र प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। शोध उपलब्धियों को कैरियर एडवांसमेंट और प्रमोशन से जोडऩे जैसे प्रयासों का भी सकारात्मक असर दिखाई दिया है। यही कारण है कि कम समय में पेटेंट और शोध प्रकाशनों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
नैक की नई व्यवस्था का इंतजार
विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने दूसरी बड़ी चुनौती नैक की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर बनी अनिश्चितता है। एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, नई मान्यता प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मूल्यांकन पुरानी प्रणाली के आधार पर होगा या नई रूपरेखा लागू होगी। इसी कारण देशभर के विश्वविद्यालयों को पुरानी ग्रेडिंग का विस्तार मिला हुआ है।


रिसर्च ही पहचान

नैक की प्रक्रिया महत्वपूर्ण और आवश्यक भी है. साथ ही किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके शोध, नवाचार और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव से बनती है.
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में शोध और पेटेंट की निरंतर बढ़ती उपलब्धियाँ यह दर्शाती हैं कि शिक्षक और शोधार्थी गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के प्रति प्रतिबद्ध हैं. हमारा लक्ष्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसे नवाचार विकसित करना है जो उद्योग, समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक समाधान प्रदान करें.

प्रो. प्रतोष बंसल
निदेशक, आईईटी एवं
निदेशक, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ,
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर