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इंदौरियों के लिए बारिश एक खूबसूरत एहसास है ।

इंदौर

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Newsdesk

Aug 07, 2026

datia news

datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

हमारे इंदौर में केवल त्योहार ही त्योहार की तरह नहीं मनाए जाते बल्कि बरसात का मौसम भी एक त्योहार बन जाता है | नम और काली मिट्टी से उठती भीनी भीनी ख़ुशबू और धरती से छम छम अठखेलियाँ करती बूँदे बारिश को और हसीन बना देती है |

शहर और आसपास जहाँ से भी गुजरो प्याज के भजिए, मुंगोड़े ,कोयले पर सिकते भुट्टे और कुल्हड़ से भाप छोड़ती अदरक की चाय माहौल में एक दीवानापन भर देती हैं । खानपान के ठियो से उड़ती सुगंध इंदौर को खास बना देती है । सराफा, छप्पन दुकान और चाट चौपाटियों पर अचानक से रौनक बढ़ जाती है ।



इंदौर में बारिश सिर्फ़ आसमान से नहीं बरसती, दिलों में भी उतरती है। पहली फुहार गिरते ही शहर की धड़कन जैसे बदल जाती है। जो लोग अभी तक ट्रैफिक, दफ़्तर और मोबाइल में उलझे थे, वे अचानक मौसम प्रेमी बन जाते हैं। कोई कह उठता है— “क्या भिया… चाय हो जाए अदरक वाली ?” और दूसरा बिना देर किए जोड़ देता है—“ यार भिया खाली पीली चाय नी पिएँगे , भजिए तो जरूरी है बारिश में “ और देखते देखते ऑफिस का बोझिल माहौल उत्सव में बदल जाता है । जिस दिन ज़्यादा बारिश हो स्कूल और कॉलेज में उपस्थिति कम हो जाती है वहाँ भी यही हाल होता है सारे के सारे मस्ती के मूड में आ जाते हैं फिर या तो कोई गेम होता है या फिर अन्त्याक्षरी या कराओके गाने शुरू हो जाते हैं । साल भर चेहरे पर जिन्हें मुस्कराहट नहीं आती ऐसे खड़ूस प्रिंसिपल भी कार्यक्रम में शामिल होकर एंजॉय कर लेते हैं ।

सप्ताहांत आते ही इंदौरी झुंड बनाकर निकल पड़ते हैं पातालपानी , चोरल डेम, जलूद, वांचूपॉइंट, जानपाव, अम्बाझर, सीतलामाता फॉल,मेहंदी कुंड , जामगेट, लोटस वेली, पितृ पर्वत, हींकार गिरी, गोमटगिरी , मांडू, महेश्वर, ओंकारेश्वर, उज्जैन की तरफ़ हरियाली ,प्रकृति, आनंद की तलाश में ।बरसात में हर इंदौरी के स्टेटस पर बरसते पानी के साथ संगीत की स्वरलहरी उठना जरूरी है । दोपहिया और चारपहिया वाहनों से परिवार और दोस्तों के साथ दिखाई देते हैं झुंड के झुंड । जगह जगह भुट्टे खाते और सेल्फी लेते लोग इंदौर की तासीर को खास बनाते हैं ज़िंदगी के एक एक पल को जीते इंदिरियों को ख़ास पलों को कैमरे में क़ैद करते देखना कितना सुकून देता है ना! बारिश में इंदौर छोटे मोटे गड्ढों की परवाह नहीं करता। कई बार गड्ढे कूदते गिरते सम्हलते लोग, चले जाते हैं ख़ुशी और सुकून की तलाश में ।



बारिश का एक खूबसूरत एहसास है दिलों को जोड़ने का ।काग़ज़ की नावें तैरते बच्चे ,छतों पर भीगते किशोर, खिड़कियों से टपकती यादें और गरम चाय के साथ लंबी गप्पें। इंदौर का मौसम लोगों को घरों में कैद नहीं करता, बल्कि रिश्तों के और करीब ले आता है। भजिए कोई अकेला नहीं खाता किसी अपने को साथ ले ही लेता है ।



शायद यही इंदौरी तासीर है—हर मौसम को त्योहार बना देना। यहाँ बारिश परेशानी से पहले पकौड़ों की याद दिलाती है, बादलों की गड़गड़ाहट से पहले ठहाके सुनाई देते हैं, और भीगने से पहले कोई न कोई पूछ ही लेता है—“क्या भिया… भीगने चले कि अभी भी मोबाइल में ही बरसात देखोगे?”


सुषमा दुबे