इंदौर में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में प्रदेश में सबसे पहले इंदौर में इस टेस्ट की शुरुआत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इंदौर/ मध्य प्रदेश समेत देशभर में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखा जा रही है। जहां एक तरफ स्थानीय प्रशासन ने जिला स्तर पर अलग अलग नियमों के तहत संक्रमण को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल एंड रिसर्च ( ICMR ) ने एक अहम कदम उठाया है। इस घातक वायरस की टेस्टिंग फास्ट करने के लिए देशभर में 'रैपिड एंटीजन टेस्ट' की शुरुआत करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इस नई तकनीक से टेस्ट की शुरुआत दिल्ली में की जा चुकी है, अब इस टेस्ट को देश के अन्य हिस्सों में भी शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
प्रदेश में यहां से होगी शुरुआत!
रैपिड एंटीजन टेस्ट को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि, ये नई तकनीक कोरोना से लड़ाई के खिलाफ बेहतर बदलाव ला सकती है। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में प्रदेश में सबसे पहले इंदौर में इस टेस्ट की शुरुआत होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके बाद प्रदेश के अन्य संक्रमित जिलों में एंटीजन टेस्ट से संक्रमण की पहचान की जा सकेगी।
सिर्फ 15 से 30 मिनट में सामने आएंगे नतीजे
टेस्टिंग प्रक्रिया तेज होने के कारण कोरोना संक्रमित मरीजों का जल्दी पता चल जाएगा, जिससे उनको जल्दी इलाज की सुविधा भी मिल जाएगी। आमतौर पर कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट 1 से 2 दिन में आती है, जबकि इस नई तकनीक वाले टेस्ट से जांच रिपोर्ट मात्र 15 से 30 मिनट में मिल जाएगी।
इस तरह करता है काम
'रैपिड एंटीजन टेस्ट' में व्यक्ति की नाक की दोनों तरफ से फ्लूइड का सैंपल लिया जाता है और उसके पास ही खड़ी एक मोबाइल बैन के अंदर बनी लेबोरेटरी में जांच किया जाता है। अगर टेस्टिंग स्ट्रिप पर केवल एक लाइन आती है, तो इसका मतलब रिपोर्ट नेगेटिव है। लेकिन नेगेटिव रिपोर्ट को पुख्ता करने के लिए RTPC तकनीक से दोबार जांच की जाती है।
साउथ कोरिया ने तैयार की ये खास जांच किट
इस नई एंटीजन किट को साउथ कोरिया की कंपनी एसडी बायोसेंसर द्वारा तैयार किया गया है। भारत में आईसीएमआर और एम्स ने किट की टेस्टिंग करने की क्षमता को जांच परख की है, जिसमें इसके बेहतर नतीजे सामने आए हैं। उम्मीद है कि, जल्द ही इसे मध्य प्रदेश समेत देशभर के संक्रमित जिलों में इस्तेमाल किया जाएगा।