पहले मार खाते थे, फिर मारना शुरू कर दिया और बदल गई हमारी पर्सनेलिटी: राजीव लक्ष्मण 

टीवी प्रजेंटर और रोडीज के होस्ट रह चुके राजीव लक्ष्मण बता रहे है अपनी लाइफ के कुछ रोचक किस्से: 

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Aug 02, 2017
इंदौर. जब हम दोनों भाई स्कूल में पढ़ते थे तो हमारी रैङ्क्षगग होती थी। स्कूल में हमारा कोई दोस्त नहीं था। ऐसे में हमारे सेक्शन भी अलग कर दिए गए ताकि दूसरे बच्चों से इंटरेक्ट करें। हम दोनों भाई पूरे दिन क्लास में दूसरे बच्चों की मार खाते थे और लंच साथ में करते थे। जब मैं 9वीं में पहुंचा तो लगा कि आखिर कब तक मार खाते रहेंगे। इसके बाद हम लोगों को मारने लगे और वहीं से हमारी पर्सनॉलिटी पूरी तरह बदल गई।

यह कहना है टीवी प्रजेंटर और रोडिज के होस्ट राजीव लक्ष्मण का। वह मंगलवार को जी टीवी पर प्रसारित हो रहे शो 'इंडियाज बेस्ट जुड़वाÓ को प्रमोट करने के लिए इंदौर में थे। राजीव ने कहा कि देश में पॉलिटिकल शोर पहले भी हुआ करता था, लेकिन वर्तमान की तरह नहीं। युवाओं को चाहिए कि ऐसे झुंड का हिस्सा बनकर अपने ऊपर किसी तरह का ठप्पा न लगने दें। अपनी अलग पहचान बनाएं। लाइफ में सभी को ट्रैवलिंग जरूर करनी चाहिए। आपको जिस जगह के लोग पसंद नहीं वहां घूमने जाएं, आपको लगेगा कि आपकी धारणा गलत थी।

राजीव ने कहा हम इतने अवेयर तो हो गए हैं कि टूरिस्ट की रिस्पेक्ट करने लगे हैं, लेकिन हमें टूरिस्ट स्पॉट की भी रिस्पेक्ट करनी चाहिए। इंदौर में इतनी खूबसूरत छत्री है, लेकिन मुझे लगता है कि उसमें सुधार होना चाहिए। हम सभी ऐसे कई देश जानते हैं जहां की इकोनॉमी टूरिज्म पर ही बेस्ड है। मुंबई का हर टीवी और फिल्म स्टार प्रमोशन के लिए इंदौर आना चाहता है। एेसे में इंदौर को टूरिज्म सेंटर के रूप में डवलप किया जा सकता है।


कभी काम नहीं आई पाइथागोरस थ्योरम
मुझे इंडियन एजुकेशन सिस्टम कभी समझ नहीं आता है। स्कूल में हमें जो पाइथागोरस थ्योरम, ओम्स लॉ आदि चीजें पढ़ाई गई वह पास होने के अलावा जीवन में कभी काम नहीं आईं। लाइफ में मैंने इथिक्स सीखें, ऑनेस्टी से काम करना सीखा, करप्शन और सोशल चेंज के बारे में जाना, लेकिन यह कभी स्कूल में पढ़ाया ही नहीं गया। आज भी ऐसा ही चल रहा है। बच्चों के माक्र्स कम आते हैं तो उनपर ट्यूशन का बोझ लाद दिया जाता है। माक्र्स कम आने के कारणों पर कोई सोचता ही नहीं है।

रघु नहीं पहुंचे तो मैंने किया शूट
जुड़वा होने के अपने फायदे हैं। एक बार किसी कार का एड शूट करना था जिसमें हम दोनों के सीन अलग-अलग थे। ऐसे में रघु किसी कारण से सेट पर नहीं पहुंच पाए तो मैंने ही रघु बनकर शूट में हिस्सा लिया और दोनों भाई का पैमेंट लिया।

एक-दूसरे के थॉट्स को भी पढ़ लेते हैं
हर ट्वीन्स की बॉन्डिंग जबरदस्त होती है। वह मां के पेट से साथ में रहते हैं इसलिए एक-दूसरे के मन की बात को भी समझ जाते हैं। उनका डीएनए सेम होता है और पसंद और न पसंद भी एक जैसी होती है। एक जैसी पसंद का ही नतीजा है कि मेरी और रघु की वाइफ को देख कर लोगों को लगता है कि वह भी ट्वीन्स है, जबकि ऐसा नहीं है।
Published on:
02 Aug 2017 03:39 pm
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