MP News: उज्जैन विकास प्राधिकरण ने 2378.039 हैक्टेयर सिंहस्थ भूमि पर स्प्रिचुअल सिटी बनाना प्रस्तावित किया है।
MP News: सिंहस्थ भूमि पर स्प्रिचुअल सिटी बनाने के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि को लेकर करीब 1300 किसानों ने अपने दावे-आपत्ति लगाई है। किसानों का कहना है कि 1800 किसानों में से आधे से अधिक ने अपनी बात यूडीए के सामने रखी है। इन दावे-आपत्तियों पर अगले दिनों में सुनवाई होकर योजना के क्रियान्वयन पर काम शुरू होगा। इधर, यूडीए सीईओ का कहना है कि उनके पास 800 दावे-आपत्ति आने की जानकारी है, अंतिम संख्या जल्द साफ होगी।
उज्जैन विकास प्राधिकरण ने 2378.039 हैक्टेयर सिंहस्थ भूमि पर स्प्रिचुअल सिटी बनाना प्रस्तावित किया है। सिंहस्थ भूमि को टीडीएस 8, 9, 10 और 11 योजना में विभक्त किया है। इसके तहत किसानों से लैंड पूलिंग योजना के तहत जमीन ली जाना है। इसके लिए किसानों को प्राधिकरण ने धारा 50 (3) के तहत नोटिस देकर किसानों से दावे-आपत्ति मांगे गए थे। इसे प्रस्तुत करने की 24 मई आखिरी तारीख थी। किसानों का कहना है, सिंहस्थ क्षेत्र के 1800 में से 1300 ने अपनी आपत्तियां प्रस्तुत कर दी है।
हालांकि दावे-आपत्ति प्रस्तुत करने में कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने भूमि अधिग्रहण के पक्ष में अपनी सुझाव भी रखे हैं। इसके लिए कुछ शर्तों में संसोधन की बात कही है। इन दावे-आपत्तियों पर कमेटी द्वारा सुनवाई की तारीख नियत कर किसानों को बुलाया जाएगा और उनकी आपत्ति व सुझावों पर चर्चा की जाएगी। बता दें कि इस प्रक्रिया के बाद धारा 50 (4) से लेकर 50 (11) तक की कार्रवाई होगी। इसके बाद भूमि अधिग्रहण कर स्प्रिचुअल सिटी की राह प्रशस्त होगी।
किसानों ने प्राधिकरण में अपनी आपत्तियां वकीलपत्र के साथ प्रस्तुत की है। दरअसल, आपत्तियों की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया रहेगी। लिहाजा सुनवाई में किसानों का पक्ष रखने के लिए वकील मौजूद रहेंगे। किसानों ने अलग-अलग क्षेत्रों के माध्यम से अभिभाषक नियुक्त किए हैं।
सिंहस्थ क्षेत्र में स्प्रिचुअल सिटी निर्माण और जमीन अधिग्रहण को लेकर प्रशासन की ओर से लगातार किसानों के साथ बैठक की जा रही है। किसानों को योजना के फायदे, उनकी शंकाओं को दूर किया जा रहा है। प्राधिकरण में किसानों को योजना के बारे में जानकारी देने के लिए अलग डेस्क बनाई है।
किसानों के दावे-आपत्ति प्रस्तुत करते समय उनकी शिकायत, समस्या और सवालों का निराकरण किया गया है। इसके चलते बड़ी संख्या में किसान योजना के प्रति सहमत भी दिखाई दिए है। दावे-आपत्ति में किसानों ने योजना में कुछ बदलाव कर अपनी सहमति भी दी है।
-सिंहस्थ मेला की आरक्षित भूमि स्थायी रूप से अधिग्रहित कर ली जाती है तो हम किसान भूमिहीन हो जाएंगे। मेरे परिवार का भरण-पोषण संकट में आ जाएगा।
-देश में लगने वाले तीनों कुंभ स्थल पर अस्थायी कुंभ नगरी लगती है। ऐसे ही व्यवस्था उज्जैन में सिंहस्थ में रहती है। इसे ही जारी रखा जाए।
-भूमि अधिग्रहण लैंड पुलिंग योजना के तहत भूमि देने को तैयार नहीं। योजना से किसान भूमिहीन होकर जीविकापार्जन का प्रश्न खड़ा हो जाएगा।
-योजना की संपूर्ण जानकारी प्रकाशित नहीं की गई और ना ही योजना के संबंध में दस्तावेज अन्य जानकारी दी गई।
-लैंड पुलिंग योजना के क्रियान्वयन से किसानों के आवास भी नष्ट होंगे। किसानों के समक्ष निवास की समस्या भी पैदा होगी।
-किसान सिंहस्थ पर्व के लिए साल के लिए जमीन देते है। इस व्यवस्था को बनाए रखा जाए। स्थायी निर्माण नहीं किए जाए।
-स्थायी निर्माण से हजारों वृक्ष नष्ट होंगे, भूमि बंजर होगी और हरियाली खत्म होगी।
योजना से प्रभावित किसान की सामाजिक, आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।
(जैसा कि किसानों ने प्रस्तुत की दावे-आपत्ति में लिखा)
सिंहस्थ भूमि अधिग्रहण को लेकर धारा 50 (3) के तहत दिए नोटिस का जवाब दे दिया है। क्षेत्र के 1300 में से 1800 किसानों ने आपत्तियां लगाई है। हमारे पक्ष बेहतर रखने के लिए वकील नामे के साथ वकील प्रस्तुत किया है।- तोलाराम पटेल, किसान
सिंहस्थ भूमि को लेकर मेरे पास 800 दावे-आपत्ति आने की जानकारी है। इनकी अंतिम संख्या सोमवार को पता चल सकेगी। जल्द ही सुनवाई की तारीख तय कर किसानों का पक्ष जानेंगे।- संदीप सोनी, सीईओ