Health news: लगातार बैठना और गलत पॉश्चर में मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग समस्या की जड़ है।
Health news:एमपी के इंदौर शहर में बदलती लाइफस्टाइल अब रीढ़ की हड्डी पर भारी पड़ रही है। 8 से 10 घंटे का स्क्रीन टाइम, लगातार बैठकर काम करना, मोबाइल पर झुकी हुई गर्दन और वर्क फ्रॉम होम की आदत ने यूथ और विमेंस में बैकपेन व स्पाइन समस्याओं को तेजी से बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार 20 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं और महिलाओं में स्लिप डिस्क व अन्य स्पाइन समस्याओं में लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, वहीं 30-40 वर्ष के आयु वर्ग में कमर दर्द के मामलों में पिछले वर्षों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत वृद्धि देखी जा रही है।
स्पाइन एक्सपर्टस और पेन मैनेजमेंट विशेषज्ञों का कहना है कि आज का युवा औसतन 7-9 घंटे प्रतिदिन स्क्रीन के सामने बिता रहा है। ऑफिस के बाद घर में मोबाइल का उपयोग रीढ़ को आराम का मौका ही नहीं दे रहा। आइटी प्रोफेशनल्स, बिजनेस पर्सन, छात्र और वर्क फ्रॉम होम कर्मचारियों में यह समस्या तेजी बढ़ी है।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. स्मिता शर्मा बताती हैं कि वर्ष 2023-24 तक 40 वर्ष के बाद स्पॉन्डिलाइटिस या स्लिप डिस्क के मरीज अधिक आते थे, लेकिन एक वर्ष में 22-25 वर्ष के युवा भी बैकपेन की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। लगातार बैठना और गलत पॉश्चर में मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग समस्या की जड़ है। गर्दन को नीचे झुकाकर लंबे समय तक स्क्रीन देखने से सर्वाइकल और लंबर स्पाइन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं में कैल्शियम की कमी और हार्मोनल बदलाव भी बैकपेन को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।
स्पाइन व पेन मैनेजमेंट एक्सपर्ट डॉ. प्रवेश कॉठेड के अनुसार, स्मोकिंग से जितना खतरा लंग्स और हार्ट को होता है, उतना ही खतरा लंबी सीटिंग से स्पाइन को होता है। इसे 'टेक्स्ट-नेक सिंड्रोम' कहा जाता है। वे बताते हैं कि मोबाइल देखने के दौरान गलत बैठने की आदत और झुकी हुई गर्दन स्पाइन पर अतिरिक्त दबाव डालती है, जिससे स्लिप डिस्क और क्रॉनिक बैकपेन का खतरा बढ़ता है।
आइटी प्रोफेशनल पूजा जैन बताती हैं कि लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करने से कमर दर्द की समस्या बढ़ी है। होममेकर अनिता सुजातिया कहती हैं कि कोविड के बाद वर्क फ्रॉम होम के दौरान डाइनिंग चेयर पर बैठकर काम करती रही हूं। पिछले लगभग एक वर्ष से लोअर बैक पेन इतना बढ़ गया कि फिजियोथेरेपी लेनी पड़ रही है।
-कंधों और बाहों में तेज दर्द।
-पैरों या हाथों में सुन्नता या झुनझुनी महसूस होना।
-मांसपेशियों का कमजोर होना, जिससे चलने में लड़खड़ाना
-बैठने, खड़े होने, या झुकने पर दर्द में वृद्धि होना, जबकि लेटने से आराम मिलना।
-हर 40-45 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक लें।
-लैपटॉप आंखों के स्तर पर रखें।
-मोबाइल का उपयोग करते समय गर्दन सीधी रखें।
-रोज 30 मिनट वॉक या योग करें।
-कैल्शियम और विटामिन का संतुलित सेवन करें।