
इंदौर. आईआईटी, आईआईएम, एमजीएम सहित कई नामी प्राइवेट संस्थान व इंस्टीट्यूट्स इंदौर में होने से प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों से हर साल हजारों की तादात में स्टूडेंट पढऩे पहुंच रहे हैं। इन स्टूडेंट को पढ़ाई से ज्यादा अब महीने के खर्च की चिंता लगी रहती है। इनमें गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों पर महंगाई की मार का ज्यादा असर है। रहना, खाना, पढऩा सब महंगा हो गया है। स्टूडेंट्स के मुताबिक 15 महीने में कमरे का भाड़ा, मैस का रेट 40 से 50 फीसदी तक बढ़ा है। यहां तक की कोचिंग संस्थानों की फीस भी बढ़ी है। एजुकेशन हब इंदौर के स्टूडेंट्स का कहना है कि प्रशासन को इन मामलों में भी दखल देना चाहिए। लोग अपने मनमाफिक अंधाधुन हर चीज का दाम बढ़ाते जा रहे है और मजबूरी में स्टूडेंट को कॅरियर के लिए जुझना पढ़ रहा है।
मजबूरी में पढ़ाई के साथ जॉब कर रहे
शि क्षाविद् एसएस गर्ग ने बताया कि इंदौर में स्टूडेंट का रहने, खाने का खर्च बढ़ा है। कॉलेज, कोचिंग की फीस बढ़ी है। ओवर अॅाल देखा जाए तो पेरेंट्स पर पढ़ाई के साथ अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ा है। 60 हजार से कम फीस तो किसी भी संस्थान की नहीं है। आज स्थिति यह है कि बच्चा कैसे पढ़े और पेरेंट्स खर्च कैसे वहन करें। गरीब व मध्यम वर्ग बच्चों की शिक्षा के लिए एक तरह से जूझ रहा है। ऐसे में अक्सर परिवार की आर्थिक स्थिति को देख पार्ट टाइम जॉब करने लग जाते है। जिससे उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित हो जाती है। लेकिन मजबूरी में कई बच्चों को पढ़ाई के साथ काम करना पड़ रहा है। ऐसे में जिम्मेदारों इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
स्टूडेंट के मन की बात
मैं ग्वालियर से 6 महीने पहले ही इंदौर में एमपीपीएसस की तैयारी करने आया हूं। कोचिंग की फीस तो ज्यादा है ही, रहना-खाना भी महंगा है। तीन दोस्त वन बीएचके फ्लेट में रहते है। जिसका किराया 12 हजार रुपए महीना है। जो की बहुत ज्यादा है। पूरे एरिये का यहीं रेट है। पढ़ाई से ज्यादा महीने के खर्च की चिंता रहती है। - संजय शर्मा बीए ऑनर्स
मैं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं। पहले के मुकाबले कोचिंगों की फीस भी 30 से 40 फीसदी बढ़ गई है। चाणक्यपुरी में एक छोटा सा कमरा 6500 रुपए महीने में मिला। यहां पर मनमाफिक कमरा किराया बढ़ाते रहते है। पुस्तकों के दाम भी बढ़ है। नाश्ता करो तो खाने के बराबर पैसे लग जाते है। महंगाई के कारण खर्च बढ़ गया है।- राजेश तिवारी, स्टूडेंट
इंदौर में पढ़ाई की अच्छी सुविधा व माहौल होने से एसएससी की तैयारी करने छिंदवाड़ा से आया हूं। कोचिंग की फीस 4 महीने में 12 हजार से 17 हजार रुपए हो गई। एक कमरे का किराया 9 हजार महीना ले रहे है। हर जगह यहीं कमरे का रेट है। जबकि 15 महीने पहले तक 4 से 5 हजार रुपए तक अच्छे कमरे मिल जाते थे। मैस में महीने का खाने का दो महीने पहले 2400 रुपए था और अब 2700 रुपए हो गया है। जो की बहुत ज्यादा है। मध्यम वर्गीय परिवार से हूं। ऐसे में पढ़ाई के साथ अन्य खर्च बहुत ज्यादा हो रहा है। गत सालों के मुकाबले दोगुने दाम हो गए है। इंदौर में अपने हिसाब से लोग किराया भाड़ा बढ़ा लेते है। इसके साथ ही एडवांस रुपए भी लेते है। इन सब के चलते मेरे जैसे हजारों स्टूडेंट्स परेशान है। इन कारणों से भी कई बीच में पढ़ाई छोडकऱ घर चले जाते है। ऐसे में खर्च चलाने के लिए पार्ट टाइम जॉब करने की मजबूरी बन गई है। - कृष्णकुमार, छिंदवाड़ा
इनके दाम बढ़े
दो कमरा किचन 5500 7000
वन बीएचके 6000-7000-9000
टू बीएचके 10000-15000-17000
भोजनालय 2400-2700-3000