
Asaram : दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा आसाराम इन दिनों पैरोल पर बाहर है। उसे कोर्ट के आदेश पर 20 दिनों के लिए रिहा किया गया है। नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को इंदौर से पकड़ा गया था। उसे कड़ी मशक्कत के बाद गिरफ़्तार किया जा सका था। राजस्थान पुलिस की टीम उसे लेकर 1 सितंबर 2013 को जोधपुर पहुंच गई। पूछताछ के लिए आसाराम को आरएसी परिसर में बने केंद्र में ले जाया गया तो वह शान से सोफे पर बैठ गया। इस पर राजस्थान पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर भन्ना गया। उन्होंने आसाराम से कहा- जमीन पर बैठ, यह सुनकर बाबा रोने लगा।
आसाराम बापू मामले में राजस्थान के आईपीएस अजय पाल लांबा ने एक किताब लिखी है 'गनिंग फ़ॉर द गॉडमैन, द ट्रू स्टोरी बिहाइंड द आसाराम बापूज़ कन्विक्शन'। वे उस वक्त जोधपुर ईस्ट के डीसीपी थे। आईपीएस अजय पाल लांबा ने अपनी पुस्तक में आसाराम केस से संबंधित अनेक घटनाएं बताई हैं। 'गनिंग फ़ॉर द गॉडमैन, द ट्रू स्टोरी बिहाइंड द आसाराम बापूज़ कन्विक्शन' के प्रकाशन पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया था जिसे बाद में हटा दिया गया।
आईपीएस अजय पाल लांबा ने एक किताब में लिखा: गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने आसाराम से पूछताछ शुरु की। उसे शाम को आरएसी परिसर लाया गया। आसाराम कमरे में लगे सोफों पर तनकर बैठ गया। आरोपी को यूं शान से बैठकर एक पुलिसकर्मी गुस्सा उठा। सब इंस्पेक्टर अमित सिहाग ने आसाराम से कहा, सोफ़े पर कैसे बैठे, चलो उठो और नीचे ज़मीन पर बैठो।" बाबा उठा और जमीन पर बैठ गया। उसके आंसू निकल आए।
जोधपुर ईस्ट के डीसीपी के रूप में आईपीएस अजय पाल लांबा वहीं उपस्थित थे। ज़मीन पर बैठते हुए आसाराम ने उनसे कहा, "ऐसा मत करो साहब।" हालांकि पुलिस ने उसे कोई रियायत नहीं दी।
इससे पहले नाबालिग़ से रेप के आरोपी आसाराम को फ़्लाइट से जोधपुर लाया गया था। उसे गिरफ़्तार करने पुलिस की स्पेशल टीम इंदौर गई थी। जोधपुर हवाई अड्डे पर पुलिस का सख्त पहरा रखा गया था।
लंबे ट्रायल के बाद आसाराम को दोषी करार दिया गया। वह जोधपुर की जेल में ही आजीवन कारावास की सज़ा काट रहा है।
अदालत द्वारा आसाराम को सजा सुनाने के बाद पीड़िता के पिता ने संतोष जाहिर किया था। उन्होंने मीडिया से कहा था, उस दुष्ट को सजा सुनाने के बाद पूरे परिवार को सुकून मिला है। हमने उसपर विश्वास कर अपने जिगर के टुकड़े को गुरुकुल में भेजा था लेकिन उसने गलत किया।