
इंदौर . मामला राजकुमार मिल के तालाब का है। गहरा होने और आसपास सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने के कारण यहां लगातार हादसे होते रहे हैं। 4 एकड़ में फैले इस तालाब के आसपास का इलाका सुनसान ही रहता है, जिसके कारण यह सुसाइड पॉइंट हो गया है। आत्महत्या के बाद इस तालाब के चारो ओर बाउंड्रीवॉल बनाई थी, लेकिन कतिपय लोगों ने इसे भी गिरा दिया है। हाल ही में यहां फिर एक युवक ने यहां आत्महत्या कर ली थी। इसके बावजूद प्रशासन इस मामले में गंभीरता नहीं बरत रहा है।
दल-दल बना तालाब
इस तालाब में बारिश का पानी जमा हो जाता है। पास ही सब्जी मंडी है, जहां से सब्जियों का कचरा भी यहां फेंक दिया जाता है। साल-दर-साल कचरे से भरते इस तालाब को पानी मिलने के बाद यह दल-दल का रूप ले चुका है। आसपास सुनसान इलाका होने और कम आवाजाही का फायदा उठाकर जिंदगी से हताश हो चुके लोग यहां आत्महत्या कर रहे हैं।
5 वर्ष में एक दर्जन हादसे
तालाब में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इसके आसपास बाउंड्रीवॉल बनाने का निर्णय करीब 5 वर्ष पूर्व किया गया था। इसके बाद से तो जैसे इस निर्णय पर विचार भी नहीं किया गया। इधर, पिछले 5 वर्ष में ही इस तालाब में करीब एक दर्जन से ज्यादा हादसे हुए। इनमें कुछ को तो बचा लिया गया, लेकिन कुछ को बचाने में फायर ब्रिगेड का महकमा भी नाकाम साबित हुआ।
फायर पुलिस के एसएन शर्मा के मुताबिक उनके कार्यकाल में ही कई बार इस तालाब में रेस्क्यू किया गया और लोगों को बचाने में कई बार काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। तालाब के आसपास कोई सुरक्षा साधन नहीं होने से यहां पर लोग आसानी से पहुंच जाते हैं। साथ ही तालाब में पानी कम और कीचड़ ज्यादा होने के चलते एक बार जो दल-दल में फंस गया उसे बाहर निकालना काफी मुश्किल हो जाता है। एेसे में हमें दोगुनी ताकत लगाकर पीडि़त को बचाना पड़ जाता है।
दर्जनों शव निकाले
फायर पुलिस से मिले आंकड़ों के मुताबिक अब तक इस तालाब में उनके द्वारा करीब 18 शवों को निकाला है। इसके अलावा पिछले कुछ बरसों में शव निकालने का काम नगर निगम के खाते में आ गया है। वहीं जिंदा लोगों को बाहर निकालने का जिम्मा अब फायर पुलिस निभा रही है। इस तरह नगर निगम और फायर पुलिस ने मिलकर करीब 50 से ज्यादा जिंदा-मुर्दा इस तालाब से बाहर निकाले हैं।