श्रावण माह में आने के कारण इस पंचमी का है काफी महत्व
इंदौर. सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी का त्योहार होता है। इस दिन नाग देवता के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस बार नागपंचमी 5 अगस्त, सोमवार को है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ऐसा 125 साल बाद हो रहा है जब सावन के सोमवार के दिन नाग पंचमी का योग पड़ा है। सोमवार को होने के कारण इस पंचमी पर महासंयोग बन रहा है। इस दिन पूजा का फल दोगुना मिलेगा।
इसलिए मनाई जाती है नागपंचमी
नागपंचमी मनाने के पीछे कई प्रचलित कहानियां हैं। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद जो विष निकला उसे पीने को कोई तैयार नहीं था। अंतत भगवान शंकर ने उसे पी लिया। भगवान शिव जब विष पी रहे थे तब उनके मुख से विष की कुछ बूंद नीचे गिरी और सर्प के मुख में समा गई। इसके बाद ही सर्प जाति विषैली हो गई। सर्पदंश से बचाने के लिए ही इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है।
ये है नागपंचमी का महत्व
ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने और रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं। मान्यता यह भी है कि इस दिन सर्पों की पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, अगर किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उसे नागपंचमी के दिन भगवान शिव और नागदेवता की पूजा करनी चाहिए।
इस दिन क्या करें
इस दिन श्रीया, नाग और ब्रह्म अर्थात शिवलिंग स्वरुप की आराधना से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और साधक को धनलक्ष्मी का आशिर्वाद मिलता है।