
Toll tax: एमपी में इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन मार्ग पर आने वाले समय में टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत खत्म हो सकती है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) इस मार्ग पर मल्टीलेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत वाहन चालक बिना बैरियर और बिना टोल बूथ पर रुके 80 किमी. प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से टोल प्लाजा पार कर सकेंगे। टोल राशि स्वत: उनके फास्टैग खाते से कट जाएगी।
एमपीआरडीसी से मिली जानकारी के अनुसार प्रबंध संचालक भरत यादव ने हाल ही में मेट्रो इन्फ्रासिस और एफईटीसी इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड के तैयार एमएलएफएफ टोलिंग सिस्टम की विस्तृत प्रस्तुति की समीक्षा की। यह अत्याधुनिक, इंटेलिजेंट और बैरियर-फ्री टोलिंग तकनीक है, जिसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भी अपने प्रमुख कॉरिडोर पर लागू कर रहा है।
निगम अब अपने आगामी सड़क प्रोजेक्ट्स में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी कर रहा है। इंदौर-उज्जैन छह लेन अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट को इसके शुरुआती क्रियान्वयन के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प माना जा रहा है। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उपलब्ध ट्रैफिक डेटा और विस्तृत यातायात विश्लेषण के आधार पर दूसरे मार्गों की पहचान की जाए, जहां इस तकनीक को प्रभावी, सुरक्षित और निर्बाध तरीके से लागू किया जा सके।
एमएलएफएफ प्रणाली में सड़क के ऊपर ओवरहेड गैन्ट्री बनाई जाती है, जिस पर हाईरिजॉल्यूशन कैमरे और अत्याधुनिक सेंसर लगाए जाते हैं। जैसे ही कोई वाहन इसके नीचे से गुजरता है, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक उसकी नंबर प्लेट को स्कैन करती है। साथ ही वाहन पर लगे फास्टैग को भी तुरंत पढ़ लिया जाता है और कुछ ही सेकंड में टोल राशि संबंधित बैंक खाते से स्वत: कट जाती है। पूरी प्रक्रिया के दौरान वाहन को कहीं भी रुकना नहीं पड़ता।
-टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा, यात्रा तेज और आसान होगी।
-लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी।
-समय और ईंधन की बचत होगी।
-बार-बार ब्रेक और एक्सीलेरेशन नहीं होने से कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
-टोल वसूली अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी।
-यात्रा का औसत समय घटेगा और सड़क की क्षमता बढ़ेगी।
-टोल संचालन की लागत कम होने और यातायात प्रबंधन बेहतर होने की संभावना रहेगी।
टोल टैक्स (Toll Tax) एक विशेष प्रकार का शुल्क है, जो वाहन चालकों को कुछ निश्चित एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय/राज्य राजमार्गों, पुलों और सुरंगों का उपयोग करने के बदले देना पड़ता है। यह सरकार द्वारा या निजी कंपनियों द्वारा सड़कों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव में आने वाले खर्च की भरपाई करने का एक तरीका है।