MP News: वाराणसी में देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक घाट तोड़े जाने से सियासी और सामाजिक तूफान खड़ा हो गया है।एमपी में कांग्रेस इसे आस्था, विरासत और सम्मान पर सीधा हमला बता रहे हैं।
Varanasi Ghats Demolition:इंदौर वाराणसी में गंगा किनारे देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा बनाए गए घाट को स्थानीय प्रशासन ने तोड़ दिया है। वहां नया निर्माण किया जाना है। अहिल्याबाई की प्रतिमा को भी नुकसान पहुंचाया गया है। इससे इंदौर में गहरा आक्रोश है। खासकर मराठी समाज में विरोध की रणनीति बन रही है। संस्थाओं ने वाराणसी प्रशासन के इस कदम की निंदा की है। (MP News)
इंदौर कांग्रेस ने बुधवार को राजबाड़ा स्थित देवी अहिल्याबाई होल्कर प्रतिमा के समक्ष मौन धरना दिया। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा यह भाजपा सरकार का सनातन आस्था पर प्रहार है। मणिकर्णिका घाट को ध्वस्त करना उसी कड़ी का हिस्सा है। जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परियोजना के नाम पर बनारस में सैकड़ों प्राचीन मंदिरों को रातोंरात जमींदोज कर दिया गया।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा, अहिल्याबाई की विरासत का अपमान अत्यंत पीड़ादायक है। इस दौरान राजेश चौकसे, गिरधर नागर, विनय बाकलीवाल अमन बजाज सादिक खान, अमित चौरसिया, जौहर मानपुरवाला, विवेक खंडेलवाल और गिरीश जोशी मौजूद रहे।
देवी अहिल्याबाई होल्कर (Devi Ahilyabai Holkar) ने काशी घाट बनवाए थे। इसमें मणिकर्णिका घाट प्रमुख है। घाट को क्यों तोड़ा गया. समझ से परे हैं। ऐतिहासिक महत्व के स्थानों में तोड़फोड़ करना गलत है। अहिल्योत्सव समिति बैठक करेगी और निर्णय लेगी। -अशोक डागा, कार्यकारी अध्यक्ष, अहिल्योत्सव समिति
देवी अहिल्याबाई ने कई घाट बनवाए हैं, जिनमें वाराणसी के घाट भी हैं। काली विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार में भी उन्होंने योगदान | दिया। घाट को तोड़ना गलत है। वीषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। आंदोलन भी किया जाएगा। -सुनील वर्माधिकारी संयोजक तरुण मंच
देवी अहिल्याबाई देशभर कराए हैं, जो हमारे लिए आदर्श है। घटना निंदनीय है। ऐतिहासिक निर्माण को ध्वस्त करना हमारी संस्कृति और धरोहर से खिलवाड़ करने जैसा है। इस पर यूपी सरकार को एक्शन लेना चाहिए।-राजेश शाह, ट्रस्टी मराठी सोशल ग्रुप
वाराणसी के घाट का ऐतिहासिक महत्व होने के साथ आस्था का केंद्र भी है। विकास के नाम पर धरोहर को तोड़ना गलत है। जन भावनाएं आहत हुई हैं। धनगर, गडरिया पाल समेत कई समाजों में | आक्रोश है। विरोध की रणनीति बना रहे हैं।-सुधीर बेड़गे, उपाध्यक्ष, अहिल्योत्सव समिति
मुझझे नहीं लगता यह काम बिना किसी कारण के किया गया हो सकता है उसका पुनः निर्माण कर पहले से भी बेहतर स्थिति में ला सके। देवी अहिल्या के लिए सभी संवेदनशील हैं। यदि बिना कारण तोड़ा गया है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। - जयंत भिसे, संरक्षक देवी अहिल्या जन्म उत्सव समिति (MP News)