
Indore News : मौसम में लगातार हो रहे बदलाव का असर अब मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। हालात ये हैं कि, शहर में सर्दी - जुकाम, खांसी और तेज बुखार के मरीजों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। कई मरीजों में वायरल फीवर के साथ फेफड़ों में संक्रमण और निमोनिया जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं। खासकर बुजुर्ग, छोटे बच्चे और शुगर, बीपी और ह्रदय संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीजों में ये संक्रमण तेजी से पहुंच रहा है।
इंदौर के चिकित्सक डॉ. तनय जोशी के मुताबिक, मौजूदा स्थिति में बड़ी संख्या में मरीज सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। कुछ मरीजों में 102 से 103 डिग्री तक बुखार देखा जा रहा है। सोमवार सुबह ही उनके पास 8-10 मरीज ऐसे आए, जिन्हें भर्ती करने की जरूरत पड़ी। इनमें उम्रदराज और पहले सर्जरी या एंजियोप्लास्टी करा चुके मरीज भी शामिल हैं।
डॉक्टर के अनुसार, ये मौसमी वायरल संक्रमण है जो खांसी और छींक से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे तक पहुंच सकता है। ऐसे में संक्रमण से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, आराम करना और शरीर को हाईड्रेट रखना जरूरी है। सामान्य तौर पर वायरल फीवर में तीन से पांच दिन तक बुखार रह सकता है।
कई लोग बुखार और कमजोरी के बावजूद काम पर चले जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बीमारी के दौरान भी खेतों में काम करते रहते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाईड्रेशन बढ़ सकता है और संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए बुखार या वायरल के लक्षण दिखाई देने पर पर्याप्त आराम करना चाहिए।
वायरल संक्रमण में खुद से एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है। डॉक्टर के मुताबिक, वायरल इंफेक्शन पर एंटीबायोटिक प्रभावी नहीं होती। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचना चाहिए। बुखार के लिए भी दवा चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही लेना बेहतर है।
डॉ. जोशी ने बताया कि, बुखार आने पर कई लोग तुरंत टायफाइड की जांच करा लेते हैं। शुरुआती दिनों में टायफाइड की कुछ जांचों के परिणाम भरोसेमंद नहीं माने जाते, इसलिए केवल रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू करना उचित नहीं है। सर्दी-जुकाम, डेंगू और अन्य संक्रमणों में भी कुछ टायफाइड टेस्ट गलत तरीके से पॉजिटिव आ सकते हैं। ऐसे में बुखार का सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, अत्यधिक कमजोरी या फेफड़ों से जुड़े लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज न करें और समय पर डॉक्टर से संपर्क करें।