इंदौर

5000 वर्ष पुरानी इस मूर्ति को देखने लोग आ रहे दूर-दूर से, जानिए क्या है खास

खासियत ऐसी की उमड़ रही मूर्ति के दर्शन को उमड़े भक्त

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Jul 09, 2018
5000 वर्ष पुरानी इस मूर्ति को देखने लोग आ रहे दूर-दूर से, जानिए क्या है खास

इंदौर. बजरंग नगर में राजस्थान के सलेमाबाद से लाई गई 5110 वर्ष पुरानी सर्वेश्वर भगवान विश्व की सबसे छोटी मूर्ति के दर्शन के लिए रविवार सुबह से भक्तों की कतार लगी। भक्तों ने मूर्ति के दर्शन करने के साथ ही श्रीनिंबार्काचार्य श्यामशरण देवाचार्य से आशीर्वाद भी लिया।

भक्तों ने सुबह 8 से 10.30 बजे तक बजरंग नगर में मूर्ति के दर्शन किए। भारतीय श्रीनिंबार्काचार्य संप्रदाय के प्रचार प्रमुख गोविंद राठी ने बताया, सुबह पूजा-अर्चना, मंगला आरती और अभिषेक के बाद मूर्ति को दर्शन के लिए रखा गया। भक्तों को हलवे का प्रसाद भी बांटा गया। केंद्र सरकार की तरफ से प्राचीन मूर्ति को झेड प्लस सुविधा प्रदान की गई है। चने की दाल बराबर स्वरूप को इत्र से भीगी रूई में मैग्नीफाइ ग्लास में विराजित किया गया।

20 सेवादारों का दल भी आया
शालिग्राम पत्थर से निर्मित इस मूर्ति में राधा-कृष्ण की छवि नजर आती है। देवाचार्य के साथ २० सेवादारों का दल भी आया है। वे सुबह वेंकटेश मंदिर छत्रीबाग भी गए। शाम को गीताभवन, गुमाश्तानगर, उषानगर, द्वारकापुरी में पदरावनी के बाद काफिला सेंधवा रवाना हुआ।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज

5110 साल पुरानी मूर्ति अपने ऐतिहासिक महत्व और छोटे आकार की वजह से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। सरकार ने इसे जेड प्लस सुरक्षा दे रखी है। शालिग्राम पत्थर की बनी इस मूर्ति में राधा-कृष्ण का युगल स्वरूप नजर आता है। भगवान के इस स्वरूप के दर्शन भक्त मैग्नीफाइंग ग्लास के माध्यम से करते हैं।

600 वर्षों से सलेमाबाद में है मूर्ति
आश्रम में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार भगवान सर्वेश्वर की यह ऐतिहासिक मूर्ति 600 वर्षों से सलेमाबाद स्थित आश्रम में रखी है। इसके पहले मूर्ति के वृंदावन में होने के दस्तावेज हैं। मूर्ति के बारे में संप्रदाय के प्रमुख संतों ने भी हजारों साल पहले ग्रंथों में उल्लेख किया था।

20 साल पहले मिली थी सुरक्षा
ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए 20 वर्ष पहले तत्कालीन सरकार ने जेड प्लस स्तर की सुरक्षा प्रदान की थी। पूजा आदि में विघ्न होने की वजह से आश्रम ने सुरक्षा घेरा छोटा करने का अनुरोध किया था। इसके बाद से बीस सेवादार और चार सुरक्षाकर्मी काफिले में रहते हैं। शेष सुरक्षा स्थानीय स्तर पर दी जाती है।

Published on:
09 Jul 2018 10:56 am
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