
Indore Contaminated Water (दूषित पानी का गढ़ बना इंदौर Photo Source- Patrika)
Contaminated Water Case : देश का सबसे स्वच्छ और मध्य प्रदेश का आर्थिक नगर इंदौर दूषित पानी का गढ़ बनता जा रहा है। शहर में एक बार फिर 'भागीरथपुरा' जैसा दूषित जल कांड सामने आया है। हालांकि, इस बार शुक्र है कि समय रहते इसका पता चल गया, वर्ना महावीरनगर का दूसरा 'भागीरथपुरा' बनना तय था।
वार्ड-16 अंतर्गत बांगड़दा क्षेत्र के महावीर नगर में कई घरों में दूषित पानी सप्लाई होने से एक दर्जन से अधिक लोग उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। घटना की जानकारी मिलने पर निगम अधिकारी हरकत में आए और इलाके में सर्चिंग शुरू करवाई गई। जांच में पता चला कि, ड्रेनेज चैंबर से सीधे गंदा पानी रिस कर बोरवेल में मिल रहा था। महावीरनगर में करीब 150 घरों में जिस सरकारी बोरवेल से पानी सप्लाई होता है, उसमें ही ड्रेनेज का पानी मिल रहा है।
रहवासियों ने आरोप लगाया कि, सोमवार को भी रहवासी पार्षद सोनाली धारकर के घर पहुंचे थे, लेकिन पार्षद मिली नहीं। सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत के बाद और घरों में मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद जिम्मेदार हरकत में आए। मामले में सीधे भोपाल से भी निगरानी की जाती रही, यहां इंटेलिजेंस की टीम भी सक्रिय रही और पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रिपोर्टिंग करती रही।
रहवासियों के अनुसार दो-तीन दिनों से पानी में बदबू आ रही थी, इसे नजरअंदाज कर दिया। जब लोग बीमार हुए तो चिंता बढ़ गई। नगर निगम, पार्षद कार्यालय और सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत की। मंगलवार को जब मरीजों की संख्या बढ़ी तो अक्रोशित रहवासी सड़कों पर आ गए, मौके पर पहुंचे निगम अधिकारियों ने जांच की तो रहवासियों के होश उड़ गए, यहां सरकारी बोरवेल में सीधे ड्रेनेज का पानी मिलते हुए दिखाई दिया।
रहवासी पार्वती चौहान ने बताया कि मैं बीमार हो गई थी। जब घर में लोग बीमार होने लगे तो अनुमान लगाया कि गंदा पानी से ऐसा हो रहा है। सभी ने तय किया कि बोरवेल में फिटकरी डाल देते हैं। फिटकरी डालने को चैंबर खोला तो, उसमें सीधे ड्रेनेज का गंदा पानी मिलता नजर आया। पार्षद सोनाली धारकर को फोन किया तो उन्होंने उठाया नहीं। घर गए तो मिली नहीं। मंगलवार को पार्षद मौके पर पहुंची और बोरवेल का कनेक्शन कटवाया।
इलाके में रहने वाली दुर्गाबाई और कमला बाई और ज्योति चौबे ने बताया कि, गली में बोरवेल सूख गए हैं, यही बोरवेल से पानी आ रहा था। उसमें भी गंदा पानी आने लगा। गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
महावीरनगर के नागेश्वर खालोटिया ने बताया कि, उनकी ढाई साल की बेटी अविका गंदा पानी पीने से बीमार हो गई। पहले निजी अस्पताल में इलाज कराया। उसे ज्यादा कमजोरी आ गई थी। जब थोड़ा अराम मिला तो चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में दिखाया। डॉक्टर्स ने बताया कि, पेट में इन्फेक्शन है और ये गंदे पानी पीने से हुआ है। इसलिए बच्ची को इलाज के लिए अहमदाबाद ले गए।
अपर आयुक्त आशीष पाठक, जोनल अधिकारी विनोद अग्रवाल सहित कई अफसरों की टीम मौके पर पहुंची। रहवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा पानी की समस्या थी, इसके बाद भी टैंकर से सह्रश्वलाई नहीं किया। मजबूरन लोग गंदा पानी पीते रहे। दोपहर बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट और दवाइयां वितरित की। एनजीओ की टीम ने सर्वे किया और दूषित पानी से पीडि़त लोगों की सूची तैयार की। हालांकि काफी देर बाद तक अफसरों ने आंकड़ा स्पष्ट नहीं किया कि कितने घरों में सर्वे हुआ और कितने संक्रमित मरीज पाए गए।
अपर आयुक्त नगर निगम आशीष पाठक ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि, महावीरनगर में नर्मदा लाइन नहीं है। बोरवेल के चैंबर तक गंदा पानी कहां से आ रहा है, इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल सप्लाई रोक दी गई है। नया बोरवेल किया जा रहा है। सभी शिकायतों की जांच कर रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने वहां सर्वे किया है। निगम भी पानी की टेस्टिंग करवा रहा है।
Published on:
17 Jun 2026 07:22 am
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