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Indore news: बारिश के मौसम में बढ़े अस्थमा के मरीज, इग्नोर न करें ये 8 लक्षण

Asthma patients: नमी और फफूंद के कारण बच्चों, बुजुर्गों व अस्थमा-ब्रोंकाइटिस रोगियों को सबसे ज्यादा खतरा है। डॉक्टरों ने सतर्क रहने और लक्षण दिखने पर तुरंत सलाह लेने की सलाह दी है।
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Asthma patients: सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ी (Photo Source- freepik)

Asthma patients: सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ी (Photo Source- freepik)

Indore news: बारिश का मौसम राहत के साथ बीमारियां भी लेकर आया है। एमपी के इंदौर शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों में इन दिनों सर्दी-खांसी, वायरल फीवर, गले में संक्रमण और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और एलर्जी से पीड़ित लोगों की परेशानी बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव, हवा में बढ़ी नमी और फफूंद (मोल्ड) के कारण रेस्पिरेटरी संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं।

सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे मरीजों पर देखने को मिल रहा है। डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव के अनुसार बरसात के मौसम में वातावरण में नमी बढऩे से धूल, फंगस और एलर्जी पैदा करने वाले कण अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इनके संपर्क में आने से सांस की नलियों में सूजन आ जाती है, जिससे मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकडऩ और बार-बार खांसी की शिकायत होने लगती है। वहीं मौसम बदलने के कारण वायरल संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है। इसके चलते सर्दीजु काम, गले में खराश, बुखार और लगातार खांसी के मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं।

कमजोर इम्यूनिटी वाले सतर्क रहे

चिकित्सकों के अनुसार बरसात के मौसम में कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में सबसे जल्दी संक्रमण की चपेट में आते हैं। यदि सांस फूलना, तेज खांसी, लगातार बुखार या सीने में जकडऩ जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

इग्नेर न करें ये लक्षण

  • लगातार सर्दी-जुकाम और खांसी
  • गले में खराश या दर्द
  • तेज या हल्का बुखार
  • सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलना
  • सीने में जकडऩ और घरघराहट
  • बार-बार छींक आना और नाक बहना
  • कमजोरी और थकान महसूस होना
  • अस्थमा के मरीजों में अटैक की संभावना बढऩा

बचाव के तरीके

  • घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
  • कमरों को सूखा और हवादार रखें, नमी व फफूंद से बचाव करें।
  • हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का उपयोग करें।
  • हाथों की नियमित सफाई करें और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें।
  • बारिश में भीगने पर तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
  • अस्थमा या सांस के मरीज अपनी दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से साथ रखें।
  • पौष्टिक भोजन लें और पर्याप्त नींद लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखें।
  • सांस लेने में तकलीफ, तेज बुखार या लगातार खांसी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।