एसबीआई के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया और देना बैंक के मर्जर के बाद देश के बाकी सरकारी बैंकों मर्जर की बातें तेज होने लगी हैं।
नई दिल्ली। एसबीआई के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया और देना बैंक के मर्जर के बाद देश के बाकी सरकारी बैंकों मर्जर की बातें तेज होने लगी हैं। आने वाले दिनों में पीएनबी के साथ देश के 17 छोटे सरकारी बैंकों का विलय हो सकता है। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में पीएनबी, केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के अलावा बाकी बैंकों में मर्जर हो सकता है। इससे उन बड़े बैंकों पर असर होगा कि जो अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
इस मर्जर की जमीन होगी तैयार
विदेशी ब्रोकरेज कंपनी सीएलएसए के अनुसार कमजोर बैंकों की हालत सुधारने के लिए पब्लिक सेक्टर के बैंकों के बीच कंसॉलिडेशन जरूरी हो गया है। सरकार की ओर से तीन बैंकों के मर्जर का प्रस्ताव दिया था। इन तीनों बैंकों के मर्जर के बाद यह देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा। माना जा रहा है कि इस मर्जर के बाद बाकी 17 सरकारी बैंकों के मर्जर की राह बनेगी।
बनेगा बड़े बैंकों पर प्रेशर
जानकारों की मानें तो निवेशकों को सरकारी बैंकों से दूर रहना जरूरी हो गया है। इन बैंकों को फंड की कमी के साथ अब कंसॉलिडेशन की चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। एक्सपर्ट के अनुसार बड़े सरकारी बैंकों के स्टॉक प्राइस पर प्रेशर बनेगा। उन्होंने बताया, श्बड़े सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट भी बड़ी है। उनके पास पर्याप्त फंड है और वे नॉन-कोर एसेट्स बेचकर बैलेंस शीट की ताकत भी बढ़ा रहे हैं।