
नई दिल्ली। नोटबंदी के एक साल के दौरान असंगठित क्षेत्र खासा प्रभावित हुआ है। इस दौरान कई राज्यों में रोजगार के अवसर कम हुए तो कई राज्यों में लोगों को छंटनी और कॉस्ट कटिंग का सामना करना पड़ा। एसोचैम के सर्वे के अनुसार 2016-17 में राजस्थान में असंगठित क्षेत्र में चार लाख से ज्यादा रोजगार आने की उम्मीद थी, लेकिन नोटबंदी के असर से असंगठित क्षेत्र में रोजगार आने तो दूर बल्कि पांच लाख से ज्यादा रोजगार प्रभावित हुए हैं।
स्टील उद्योग प्रभावित
असंगठित क्षेत्र में नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा नुकसान स्टील सेक्टर में ठेके पर काम कर रहे मजदूरों को भुगतना पड़ा। राज्य में लगभग 10 हजार से अधिक मजदूरों को छंटनी हई।
4 लाख से ज्यादा रोजगार प्रभावित
उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल में चार लाख से ज्यादा लोगों के रोजगार छिन गए। उत्तर प्रदेश में 75 प्रतिशत उद्योग असंगठित क्षेत्र में है। नोटबंदी के बाद यहां के हालात बद से बदतर हो गए।
साड़ी उद्योग परेशान
उत्तर प्रदेश के असंगठित उद्योगों में साड़ी उद्योग पर खासा असर पड़ा है। लखनऊ की चिकिन कारीगरी के मजदूर भी परेशान हाल हैं। कानपुर का चमड़ा उद्योग और कपड़ा उद्योग भी बदहाल स्थिति में है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
राष्ट्रीय मजदूर कांगे्रस के महामंत्री देवनाथ वैष्णव ने पत्रिका से एक बातचीत में बताया कि,नोटबंदी के बाद अब तक के हालातों पर गौर करें तो निश्चित तौर पर कई लोगों को नौकरी से हाथ गंवाना पड़ा है। वहीं लघु उद्योग भारती के प्रांतीय महामंत्री पुरूषोत्तम पटेल ने कहा कि, नोटबंदी के बाद कई उद्योग और व्यवसाय को तगड़ा झटका लगा, जिसका असर सीधे तौर पर असंगठित क्षेत्र के रोजगार पर पड़ा। सरकार को उन उद्योगों के प्रति नरम रवैया अपनाना होगा, जो बदहाल स्थिति में हैंं, ताकि नोट बंदी के असर से पूरी तरह से बचा जा सके। ये कहना है उत्तर प्रदेश श्रमिक एवं कल्याण संघ के सचिव हरिशंकर मिश्र।
तीन बड़े राज्यों के हालात
राजस्थान के 30 फीसदी रोजगार कम हुए तो वहीं 20 फीसदी तक कारोबार पर लगा ताला। छत्तीसगढ़ में 10,000 से ज्यादा कामगारों की स्टील उद्योग में हुई छटनी। वहीं एक और बड़े राज्य उत्तर प्रेदश की बात करें तो यहंा पर भी 35 फीसदी कामगारों की छंटनी, इसके साथ ही साड़ी उद्योग भी बेहाल हो चुका हैं।