
नई दिल्ली। मोटेरा स्टेडियम में अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा था कि भारत और अमरीका दोनों देश इस्लमिक आतंकवाद से निपटने के लिए प्रतिबद्घ हैं। इस कथन के कई मायने थे। ट्रंप अमरीका के संदर्भ में आईएसआईएस से सीधे जोड़ दिया था। वहीं भारत के संदर्भ में इसे पाकिस्तान से लिया जा रहा है। खास बात तो ये है कि पाकिस्तान का सिरदर्द करने वाली डिफेंस डील है। जो करीब 22 हजार करोड़ रुपए की है। जिसके तहत अमरीका भारत को अत्याधुनिक हथियार दे रहा है। यह हथियार भारत की नेवी के साथ साथ वायू सेना और थल सेना को भी मजबूती देंगे। जिस पर आज देश की राजधानी दिल्ली में हस्ताक्षर भी होंगे।
मोटेरा में ट्रंप ने दी थी जानकारी
सोमवार को गुजरात पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति ने अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में कहा था कि हम अपने रक्षा सहयोग को निरंतर आगे बढ़ाते रहेंगे। अमेरिका भारत को विश्व के ग्रह के सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक घातक सैन्य उपकरण प्रदान करने के लिए तत्पर है। हम सबसे अच्छे हथियार बनाते हैं और हम अब भारत के साथ सौदा कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि कल हमारे प्रतिनिधि भारतीय सैन्य बलों के लिए तीन अरब डॉलर से भी अधिक के विक्रय सौदे पर हस्ताक्षर करेंगे, जिनमें अत्याधुनिक सैन्य हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं।"
अमरीका और ट्रंप दो डील पर करेंगे हस्ताक्षर
आज भारत और अमरीका के बीच दो तरह की डील होने जा रही है। यह दोनों डील रक्षा सौदों ( Defence Deal ) को लेकर होगी। डील के तहत अमरीका भारत को एमएच-60 'रोमियो' नौसैनिक बहु-मिशन हेलीकाप्टर्स देगा। इन हेलीकाप्टर्स की संख्या 24 बताई जा रही है। यह डील 2.12 अरब डॉलर की होगी। वहीं छह एचएच -64ई अपाचे हेलिकॉप्टरों के लिए अमरीका के साथ डील होगी। जिसकी कीमत 79.6 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
दौरे से पहले ट्रेड डील पर ट्रंप का यह था बयान
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ( Donald Trump ) ने अपने भारत दौरे से पहले किसी बड़ी डील को लेकर मना कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वो अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही करेंगे। भारत की ओर से उम्मीद की जा रही है कि अमरीका जीएसपी को कोई राहत देगा। लेकिन अमरीका ने भारत को अपने लिस्ट में विकसित देशों की सूची में डालकर यह रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया है। जानकारों की मानें तो ट्रंप दौरे में भारत की सबसे बड़ी सफलता जीएसपी दर्जा दोबारा हासिल करना ही है। जिसपर दोनों देशों की एक बार फिर से बात हो सकती है।