उद्योग जगत

मुकेश अंबानी को हुआ करोड़ों का घाटा, 13 हजोर करोड़ की गैस पाइपलाइन बेचकर करेंगे वसूली

मुकेश अंबानी एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। मुकेश अंबानी के इस बड़े कदम के बाद उनके बिजनेस में काफी बड़ा बदलाव होगा। आपको बता दें कि मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन लिमिटेड को बेचने का प्लान बना रही है।
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Mar 15, 2019
mukesh ambani
मुकेश अंबानी को हुआ करोड़ों का घाटा, 13 हजोर करोड़ की गैस पाइपलाइन बेचकर करेंगे वसूली

नई दिल्ली।मुकेश अंबानी एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। मुकेश अंबानी के इस बड़े कदम के बाद उनके बिजनेस में काफी बड़ा बदलाव होगा। आपको बता दें कि मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन लिमिटेड को बेचने का प्लान बना रही है। अंबानी अपनी कंपनी को कनाडा की एक कंपनी को बेचेगी।


1400 लंबी है गैस पाइपलाइन

आपको बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की 1400 किमी लंबी गैस पाइपलाइन बिकने जा रही है। अंबानी गैस पाइपलाइन को कनाडा की कंपनी ब्रुकफील्ड को 13000 करोड़ रुपए में बेचेंगे। इसके साथ ही ब्रुकफील्ड स्पॉन्सर्ड InvIT पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (PIPL) में 100 फीसदी इक्विटी का अधिग्रहण करेगी।


13 हजार करोड़ रुपए चुकाएगी कंपनी

कनाडा की कंपनी इस पाइपलाइन के बदले मुकेश अंबानी को 13 हजार करोड़ रुपए चुकाएगी। आपको बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बयान में जानकारी देते हुए बताया कि ब्रुकफील्ड द्वारा स्पॉन्सर और इसकी 90 फीसदी हिस्सेदारी वाले इंडिया इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के जरिए यह अधिग्रहण किया जाएगा.


गुजरात में है पाइपलाइन

आपको बता दें कि मुकेश अंबानी की यह पाइपलाइन आंध्र के तटीय क्षेत्र काकिनाडा से गुजरात के भरूच तक बिछाई गई है। कृष्णा गोदावरी बेसिन के Reliance Industries (RIL) blocks में प्राकृतिक गैस के उत्पादन में गिरावट होने से घाटा हो रहा था। इसकी क्षमता के सिर्फ पांच प्रतिशत ही इस्तेमाल हो रहा था।


आरआईएल ने दी जानकारी

आपको बता दें कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन लिमिटेड का नाम पहले रिलायंस गैस ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड रखा गया था। यह 1400 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का संचालन करती है। वहीं, आरआईएल ने जानकारी देते हुए बताया कि उसके पास गैस को ट्रांसपोर्ट करने का अधिकार रहेगा।


2009 में हुई थी शरुआत

इसका परिचालन 2009 में शुरू हुआ था। कंपनी ने बयान में कहा कि किसी भी अप्रयुक्त क्षमता के लिए आरआईएल को प्रति तिमाही 500 करोड़ रुपए और पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा अर्जित वास्तविक आय के बीच के अंतर के जितना भुगतान करना होगा।

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Published on:
15 Mar 2019 04:27 pm