रेटिंग एजेंसी क्रेडिट स्विस ने भी पतंजलि की ग्रोथ में रुकावट को माना है। क्रेडिट स्विस ने तो इसके पीछे कर्इ अहम कारण भी गिनाएं हैं।
नर्इ दिल्ली। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के लाॅन्च होने के थोड़े दिनों बाद ही बाजार में इस कंपनी की खूब चर्चा हुर्इ। लेकिन आयुर्वेदिक आैर स्वदेशी प्रोडक्ट्स के नाम पर भारतीय बाजार में कदम रखने वाली पतंजलि की चमक अब फीकी पड़ती हुर्इ दिखार्इ दे रही है। इसके पहले पतंजलि आयुर्वेद को लेकर जानकाराें ने कयास लगाया था कि ये कंपनी देश की अग्रणी एफएमसीजी कंपनियों को पछाड़ सकती है। लेकिन बीते कुछ समय में कंपनी के परफाॅर्मेंस आैर टर्नआेवर पर नजर डालें तो ये बात पतंजलि के लिए दूर की कौड़ी दिखार्इ पड़ रही है। दिलचस्प बात ये है कि रेटिंग एजेंसी क्रेडिट स्विस ने भी पतंजलि की ग्रोथ में रुकावट को माना है। क्रेडिट स्विस ने तो इसके पीछे कर्इ अहम कारण भी गिनाएं हैं। एेसे में आइए जानते हैं कि आखिर क्या है वो कारण जिसने पतंजलि के लिए बाजार में अपनी वर्चस्व कायम करने में बाधा बन रही है।
दूसरी कंपनियों ने पतंजलि को छोड़ा पीछे
क्रेडिट स्विस की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में पतंजलि ने देश के घर-घर में अपनी पहुंच बनाते हुए अपनी ग्रोथ में 45 फीसदी की इजाफा थी। इसका सबसे बड़ कंपनी की आयर्वेदिक आैर नैचुरल प्रोडक्ट्स था। लेकिन दूसरी कंपनियों ने भी बाजार में इस तरफ के प्रोडक्ट्स को उतारते हुए पतंजलि को कड़ी टक्कर दी है। वहीं दूसरी तरफ पतंजलि नए-नए प्रयोग करने के चक्कर में पिछड़ती गर्इ। पतंजलि ने जब शुरुअात की थी तो वो अपने प्रोडक्ट्स को चिकित्सालयों आैर फ्रेंचाइजी के माध्यम से सेल करती थी। इसके बाद कंपनी ने किराना स्टोर्स के तरफ बढ़ती हुर्इ दिखार्इ दी आैर नए डिस्ट्रीब्यूटर्स बनाए। इसी दौरान चिकित्सालयों की चेन पर असर पड़ा आैर वो कमजोर होती दिखार्इ दी। लेकिन नए डिस्ट्रीब्यूशन में अनुमान अनुसार विस्तार नहीं हो पाया। देश की अग्रणी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर से तुलना करें तो इसके मुकाबले पतंजलि का डिस्ट्रीब्यूशन 1/30 है।
पतंजलि की छवि पर पड़ा असर
बाजार में पकड़ बनाने के लिए पतंजलि का सबसे बड़ी यूएसपी उसकी आयुर्वेदिक फार्मेसी थी। जिसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे हर्बल आैर आॅर्गेनिक फूड प्रोडक्ट्स के तरफ बढ़ी थी। कंपनी ने अलग-अलग सेग्मेंट के कर्इ प्रोडक्ट्स बाजार में उतारे जैसे बिस्किट, नूडल्स, फ्रोजेन वेजिटेबल्स अादि। इस वजह से कंपनी के आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनी की छवि पर भी खासा असर पड़ा आैर नतीजतन कंपनी की बाजार में चमकी फीकी पड़ती दिखार्इ दी। इसी दौरान कर्इ दिग्गह कंपनियों ने भी आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स के सेग्मेंट में काफी विस्तार किया है।
टाॅप एडवर्टाइजर्स की लिस्ट से बाहर हुर्इ पतंजलि
एक्सचेंज फाॅर मीडिया ने अपने मर्इ माह की एक रिपोर्ट में कहा है कि इस साल 16 सप्ताह मे बार्क की टाॅप एडवर्टाइजर्स की लिस्ट में पतंजलि शामिल ही नहीं रही। इसके अलावा बाकी के 9 सप्ताह के दौरान भी पतंजलि टाॅप 5 से बाहर ही रही। इस दौरान कंपनी 5वें नबर से 10वें नंबर के बीच ही रही। इसका सबसे बड़ी वजह ये बतार्इ जा रही है कि पतंजलि ब्रांड अब लोगाें के बीच पहले से कमजोर पड़ती दिखार्इ दे रही है। हालांकि बाबा रामदेव कंपनी के अाक्रामक ब्रान्ड अंबैस्डर रहे हैं।