Total Housing Market का 70 फीसदी हिस्सा शीर्ष सात शहरों में है Housing Market 30 फीसदी हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों में Real Estate: Covid-19 के बाद एक अलग विश्व नाम से रिपोर्ट तैयार की
नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी ( Coronavirus Pandemic ) के कारण महानगरों से शुरू हुए पलायन के कारण रिवर्स माइग्रेशन ( Reverse Migration ) को बढ़ावा मिला है, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों में प्रारंभिक तौर पर घरों की मांग बढ़ने की संभावना है। प्रॉपर्टी कंसलटेंट फर्म एनरॉक ( Property Consultant firm Anarock ) की रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में भारत के कुल आवासीय बाजार ( Housing Market ) का 70 फीसदी हिस्सा शीर्ष सात शहरों में है, जबकि शेष 30 फीसदी हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों में है। भविष्य में आवासीय बाजार का यह औसत बदल सकता है।
Reverse Migration का दिया नाम
राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान होने वाला पलायन सामान्य दिनों की अपेक्षा होने वाले पलायन से एकदम उलट है। अमूमन हम सब रोजगार पाने व बेहतर जीवन जीने की आशा में गांवों और कस्बों से महानगरों की ओर पलायन होते देखते है, मगर इस समय महानगरों से मध्यम व छोटे शहरों की ओर पलायन की संभावना अधिक बढ़ गई है। इसी स्थिति को ही जानकारों ने रिवर्स माइग्रेशन का नाम दिया है। एनरॉक की ओर से इंडिया रियल एस्टेट: कोविड-19 के बाद एक अलग विश्व नाम से तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 के बाद की दुनिया भारत के रियल एस्टेट के लिए अपने आप में प्रेरणादायक रहेगी।
कम लागत का मिलेगा लाभ
रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी का कारण शुरू हुआ रिवर्स माइग्रेशन टियर-2 और टियर-3 शहरों में आवास की मांग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेट्रो शहरों में नौकरी खोने वाले लोगों के रिवर्स माइग्रेशन से लखनऊ ( Lucknow ), इंदौर ( Indore ), चंडीगढ़ ( Chandigarh ), कोच्चि ( Kochi ), कोयंबटूर ( Coimbatore ), जयपुर ( Jaipur ) और अहमदाबाद ( Ahmedabad ) जैसे शहर लाभान्वित होंगे। इन लोगों को टियर-2 और टियर-3 शहरों के बेहतरीन बुनियादी ढांचे और जीने की कम लागत का लाभ मिलेगा।
बढ़ेगी Rental Housing की मांग
एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, प्रवासी मजदूरों के बीच रिवर्स माइग्रेशन पहले से ही बहुत दिखाई दे रहा है। यह प्रवृत्ति उन कुशल पेशेवरों में भी दिख सकती है, जो अधिकृत रूप से नौकरी से बाहर हो चुके हैं या उनके बाहर होने की संभावना है। इस कारण छोटे कस्बों और शहरों में घरों की मांग बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक तौर पर किराये के घर की मांग बढ़ेगी। रेंटल हाउसिंग की मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय निवेशकों की ओर से किए जाने वाले निवेश से खरीदारी बढ़ेगी।
NRI के लिए शहर पहली प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों में नौकरी की संभावना कम होने के बाद बड़ी संख्या में एनआरआई के भारत लौटने की संभावना है। इन एनआरआई के लिए शीर्ष सात शहर पहली प्राथमिकता रहेंगे, लेकिन इनमें से कई अपने परिवारों के नजदीक छोटे शहरों में रहने के बारे में भी विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि रिवर्स माइग्रेटिंग के जरिए छोटे शहरों में लौट रहे भारतीयों को उपयुक्त रोजगार उपलब्ध कराना भी एक चुनौती साबित हो सकता है। बंद के दौरान एनरॉक के हालिया उपभोक्ता सर्वेक्षण से संकेत मिलता है कि उत्तरदाताओं ने 2020 में टियर-2 और टियर-3 शहरों में निवेश करना पसंद किया है।