चावल के दाने से छोटे इस कम्प्यूटर में पारंपरिक कम्प्यूटरों की तरह रैम, फोटोवोल्टिक्स के साथ प्रोसेसर, वायरलेस ट्रांसमीटर्स और रिसीवर्स भी लगे हैं। इस सबसे छोटे कम्प्यूटर को मिशिगन माइक्रो मोट नाम दिया गया है।
नई दिल्ली। तकनीक के जमाने में आज दुनियाभर के वैज्ञानिक और इंजीनियर नैनो तकनीक का इस्तेमाल कर छोटी से छोटी चीजें बनाने में जुटे हैं। इन छोटी चीजों को बनाने का असल मकसद इंसानी जीवन को और सरल बनाने के साथ हर समस्या का आसान उपाय ढूंढ़ना है। कई वैज्ञानिक अपने इस प्रयास में सफल भी रहे हैं। आज वैज्ञानिक लगभग हर समस्या का समाधान खोज चुके हैं या खोजने के करीब हैं। इन सब खोजों में कम्प्यूटर का बड़ा महत्व रहा है। अब इंजीनियरों ने दुनिया का सबसे छोटा कम्प्यूटर बनाकर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है। खास बात यह है कि दुनिया के इस सबसे छोटे कम्प्यूटर का साइज चावल के दाने से भी छोटा है। आइए आगे आपको बताते हैं कि इस छोटे कम्प्यूटर का आविष्कार किसने और कहां किया है।
0.3 मिलीमीटर है इस कम्प्यूटर का साइज
दुनिया के इस सबसे छोटे कम्प्यूटर को बनाने का दावा अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के रिसर्चर्स ने किया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार इस सबसे छोटे कम्प्यूटर की चौड़ाई मात्र 0.3 मिलीमीटर है और इसका डिजाइन किसी माइक्रोडिवाइस की तरह है। इस कम्प्यूटर को चावल के दाने से भी छोटा बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार इस छोटे से कम्प्यूटर को बनाने वाली टीम के हेड प्रोफेसर डेविड ब्लॉ का कहना है कि इस नई माइक्रोडिवाइस के कम्प्यूटर जितना कार्य किया जा सकता है। लेकिन इसे कम्प्यूटर कहा जाए या नहीं, यह लोगों पर निर्भर करता है।
पारंपरिक कम्प्यूटर की तरह रैम और प्रोसेसर भी
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार टीम हेड डेविड का कहना है कि चावल के दाने से छोटे इस कम्प्यूटर में पारंपरिक कम्प्यूटरों की तरह रैम, फोटोवोल्टिक्स के साथ प्रोसेसर, वायरलेस ट्रांसमीटर्स और रिसीवर्स भी लगे हैं। इस सबसे छोटे कम्प्यूटर को मिशिगन माइक्रो मोट नाम दिया गया है। यह डिवाइस टेंपरेचर सेंसर के तौर पर काम करती है। इसकी मदद से 0.1 डिग्री सेल्सियस से भी कम का अंतर पता किया जा सकता है।
मेडिकल विज्ञान के लिए वरदान साबित होगा यह कम्प्यूटर
यह एक काफी फ्लेक्सिबल और अलग-अलग कामों के लिए इस्तेमाल होने वाला सिस्टम है। इस डिवाइस को मेडिकल विज्ञान के लिए वरदान माना जा रहा है। इसकी मदद से कोशिका विज्ञान और कैंसर का इलाज किया जा सकता है।