
नई दिल्ली। टेलिकॉम अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी ट्राई नेट न्यूट्रलिटी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अपनी सिफारिश में कहा है कि इंटरनेट पर लोगों के साथ कंटेट के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता है। ट्राई का कहना है कि सर्विस प्रोवाइडर्स को ऐसा कोई करार नहीं करना चाहिए जो कंटेंट के आधार पर भेदभाव करता हो। इसके अलावा ट्राई ने लाइसेंस नियमों में संशोधन की बात कही है और उसका कहना है कि इससे इंटरनेट आधारित सामग्री को लेकर किसी भी ग्राहक के साथ भेदभाव पर अंकुश लगेगा। ट्राई ने कहा है कि इंटरनेट की आजादी बनी रहनी चाहिए। गौरतलब है कि नेट न्यूट्रैलिटी के मुद्दे पर इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और ऐप डेवलेपर के बीच लंबे समय से विवाद है।
क्यों है विवाद
भारत में नेट निरपेक्षता के लिए कोई कानून नहीं है जबकि कई दूसरे देशों में नेट निरपेक्षता के पक्ष में कानून बन चुका है। ट्राई की इस सिफारिश से फेसबुक फ्री बेसिक्स जैसी सेवाएं नहीं दे पाएगा। इसके अलावा व्हाट्स एप जैसे प्लेटफॉर्म पर फ्री कॉलिंग की सुविधा भी लोगों को मिलती रहेंगेी जिस पर टेलीकॉम कंपनियां चार्ज वसूलने का दबाव बना रहीं थी। ट्राई ने टेलीकॉम विभाग से इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के लाइसेंसिंग नियमों में भी बदलाव करने को कहा है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कंटेंट के आधार पर इंटनेट इंटरनेट इस्तेमाल करने में भेदभाव न किया जा सके।
कमेटी का होगा गठन
किसी भी तरह के नियमों का उल्लंघन न हो इसके लिए ट्राई ने एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाने की सिफारिश की है। यह कमेटी नियमों के उल्लंघन की जांच भी करेगी। केंद्र सरकार ट्राई की सिफारिशों के आधार पर पर नेट न्यूट्रलिटी पर पॉलिसी बनाएगी। जिसके तहत उन सर्विस प्रोवाइडर पर नजर रखी जाएगी जो मनमाने ढंग से लोगों से चार्ज वसूलते हैं।