
इटारसी। शासकीय एमजीएम कॉलेज का प्रबंधन पिछले एक दशक से एक लाइब्रेरियन के लिए तरस रहा है। लाइब्रेरियन का पद शासन से अभी तक नहीं भरा है। ऐसे में कंप्यूटर आपरेटर से ही स्टूडेंट्स को किताबें मिल पाती है, लेकिन इससे पहले उन्हें किताबें स्वयं आलमारी से निकालकर देनी पड़ती है।
इटारसी तहसील का सबसे बड़ा और एकमात्र एमजीएम कॉलेज को खुले चार दशक से अधिक हो चुके हैं। समय के साथ स्टूडेंट्स की संख्या भी बढ़ती गई। आज इस कॉलेज में लगभग 3400 छात्र- छात्राएं पढ़ते हैं। इनके लिए लाइब्रेरी में लगभग 60 हजार किताबें हैं।
किताबें ढूंढनें में लगता है वक्त
छात्रों का कहना है कि कॉलेज की लाइब्रेरी अच्छी है। किताबें भी व्यवस्थित रखी है, लेकिन कई बार कोर्स की किताबें या रिफरेंस बुक के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। इन किताबों को ढूंढने में वक्त लगता है। इससे छात्रों का समय बर्बाद होता है।
एकमात्र कंप्यूटर ऑपरेटर के भरोसे लाइब्रेरी
कॉलेज में लाइब्रेरियन नहीं होने से लाइब्रेरी का प्रभार एक कंप्यूटर ऑपरेटर के भरोसे हैं। यह आपरेटर स्टूडेंट्स द्वारा ली गयी किताब की एंट्री करने के अलावा कॉलेज के अन्य काम भी करता है। एक साथ बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स के आ जाने से कई बार एंट्री करने में देरी हो जाती है। इसके लिए छात्रों को काफी वक्त इंतजार करना पड़ता है।
मांग करने के बाद भी नहीं मिला लाइब्रेरियन
कॉलेज प्रबंधन का दावा है कि बीते दस साल से लाइब्रेरियन का पद खाली है। इस पद को भरने के लिए प्रबंधन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखा, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। अब फिर से लाइब्रेरियन की नियुक्ति के लिए जनभागीदारी समिति से प्रक्रिया शुरू कराएंगे।
एमजीएम कॉलेज में लाइब्रेरियन के स्थायी पद की सख्त जरूरत है। हम जनभागीदारी समिति से प्रस्ताव भेजकर इस पद को भरने की मांग करेंगे।
- राजकुमार उपाध्याय, अध्यक्ष जनभागीदारी समिति, एमजीएम कॉलेज, इटारसी।
कॉलेज में लाइब्रेरियन के अभाव में छात्र- छात्राओं को परेशानी होती है। इससे टीचिंग स्टॉफ पर भी काम का अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
- अर्जुन यादव, उपाध्यक्ष, एमजीएम कॉलेज छात्र संघ, इटारसी।
इस कॉलेज में छात्र और किताबों की संख्या के अनुपात से स्थायी रुप से लाइब्रेरिन के पद के लिए उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है। जल्दी यह पद भरा जाएगा।
- डॉ. आरके तिवारी, प्राचार्य, एमजीएम कॉलेज, इटारसी।