
जबलपुर. 'आदि शंकराचार्य के सिद्धांतों का पालन करने से ही वर्तमान समय में राष्ट्र की अखंडता की रक्षा होगी। आदि शंकराचार्य ने यह प्रमाणित किया कि सनातन धर्म पूर्णत: वैज्ञानिक है। ये विचार सिविक सेंटर स्थित श्री बगलामुखी सिद्धपीठ शंकराचार्य मठ में आयोजित जयंती समारोह को सम्बोधित करते हुए ब्रम्हचारी चैतन्यानंद महाराज ने व्यक्तकिए। कार्यक्रम के पहले आदि शंकराचार्य का पूजन अर्चन किया गया। इस दौरान शहर के समस्त प्रमुख संत उपस्थित रहे।
चार पीठ की स्थापना
कार्यक्रम में ब्रम्हचारी चैतन्यानंद ने आदि शंकराचार्य का जीवन परिचय प्रस्तुत किया। स्वामी राधे चैतन्य ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने हिंदुओं का स्तम्भ बनते हुए चार पीठ की स्थापना की। समारोह में नगर पंडित सभा के वासुदेव शास्त्री, नर्मदा प्रसाद शर्मा ने भी विचार व्यक्तकिए। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष राजेश सोनकर, मधु यादव, पार्षद विनय सक्सेना, वीके पटेल, प्रकाश द्विवेदी, मनोज सेन, हेमंत मिश्रा आदि उपस्थित थे।
समन्वय सेवा केंद्र
समन्वय सेवा केंद्र छोटी लाइन फाटक में आदि शंकराचार्य का प्रकटोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र जामदार ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म का ध्वज लेकर देश में तीन बार परिक्रमा करके आध्यात्मिक चेतना जगाई। महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा कि विवेक व वैराग्य से ही मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। इस अवसर पर डॉ. कृष्णकांत चतुर्वेदी, भगवान भाई धीरावाणी, डॉ.अशोक श्रीवास्तव, राजाराम अग्निहोत्री उपस्थित थे।
प्रतिमा स्थापित
दशानन गोस्वामी समाज जबलपुर के तत्वावधान में कुदवारी अमखेरा में आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित की गई। खास तौर पर तैयार की गइ आदिगुरु शंराचार्य की प्रतिमा के स्थापना इस अवसर पर सुहागलें हुई। प्रभातफेरी निकाली गई। इस अवसर पर स्वामी अखिलेश्वरानंद ने धर्मसभा को सम्बोधित किया। कार्यक्रम में अवधेशानंद त्यागी, वैशाखी नंद, सत्यनारायण गिरि, सुरेंद्र गिरि गोस्वमी, भारत सिंह यादव, डॉ. सुधीर अग्रवाल, रजनी यादव, अमरीश गिरि उपस्थित थे।