ऐसे होता है अमावस्या की रात से शुरू हुआ अहीर नृत्य, देखें VIDEO..

गीतों की धुन ऐसी कि सुनने वाले भी थिरकने से खुद को न रोक सकें। अहीर नृत्य की परंपरा कब शुरू हुई ये कोई नही बता पाता।

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Oct 31, 2016
ahir
जबलपुर। पैरों में घुंघरू और पारंपरिक वेश-भूषा, अपनी धुन में मदमस्त होकर नाचते अहीर। गीतों की धुन ऐसी कि सुनने वाले भी थिरकने से खुद को न रोक सकें। अहीर नृत्य की परंपरा कब शुरू हुई ये कोई नही बता पाता। लेकिन आज भी इसे परंपरागत रूप से वैसे ही देखने मिलता है जैसे बरसों पहले।

अहीर नृत्य के नजारे दिवाली (अमावस्या) की रात से ही देखने मिलने लगते हैं। जो कि पूर्णिमा तक जारी रहते हैं। बताया जाता है कि अहीर नृत्य के लिए जिन परंपरागत वस्त्रों को धारण किया जाता है पहले उनकी पूजा की जाती है। वादन यंत्र भी विधि-विधान से पूजे जाते हैं। उसके बाद देवों की पूजा कर अहीर नृत्य किया जाता है।


अहीर नृत्य कर रहे मंगल सिंह यादव कहते हैं कि पीढिय़ां गुजर गईं यह परंपरा निभाते। हम से पहले हमारे परिवार में कितने सालों से ये परंपरा है ये बताना मुश्किल है। नृत्य के लिए हर साल अहीरों की टोली शहर में घूम-घूम कर घरों में जाती है और परंपरागत नृत्य करते हैं। जिनके घर में अहीर नृत्य करते हैं वे उनका टीका लगाकर सम्मान करते हैं और उपहार भेंट करते हैं।

ahir
Published on:
31 Oct 2016 07:04 pm
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