
जबलपुर। हल्दी को सब रोगों की एक दवा कहा जाता है। इसके सेवन से जहां शरीर स्वस्थ रहता है, वहीं इससे बनने वाली दवाओं से अच्छे अच्छे मरीज खड़े होकर दौडऩे लगते हैं। इसकी खूबियों को गिनाने और लोगों भक्तिभाव व पर्यावरण का महत्व बताने के उद्देश्य से जबलपुर में हल्दी के गणेश बनाए गए हैं।
एक गणेश भक्त शरद ताम्रकार ने हल्दी के गणेश बनाकर लोगों को प्रकृति प्रेम का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि ये ईको फ्रेंडली गणेश लोगों को यह बताने के लिए खुद बनाए है कि वे पर्यावरण को समझें और उसे संरक्षित, सुरक्षित रखने में अपना सहयोग प्रदान करें। हल्दी के गणेश पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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गणेश चतुर्थी के मौके पर शुक्रवार को मंदिरों, पंडालों एवं घरों में प्रथम पूज्य गजानन की पूजा-अर्चना की गई। गणेश मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। सिद्ध गणेश मंदिर ग्वारीघाट में ११ दिवसीय गणेशोत्सव शुरू हुआ। भक्तों ने मनोकामना पूर्ति के लिए भगवान के दर्शन पूजन किए। सुबह गणपति अथर्वशीर्ष संकट नाशन स्तोत्र से अनुष्ठान शुरू हुआ। प्रथम दिन श्वेत श्रृंगार किया गया। शाम को महाआरती में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की। सुप्तेश्वर गणेश मंदिर रतन नगर में दोपहर १२ बजे भगवान गणेश जन्मोत्सव मनाया गया।ललपुर रोड स्थित रजत गणेश की मूर्ति की स्थापना धूमधाम से की गई। श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे के साथ ग्वारीघाट के राजा गणेश की शोभायात्रा निकाली।
सिद्ध गणेश मंदिर ग्वारीघाट में दस दिवसीय गणेशोत्सव का आयोजन हो रहा है। सुबह से शाम तक विविध धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। वहीं गोरखपुर स्थित गणेश मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की जा रही है। यहां भगवान के लड्डू पाने वालों की शाम से ही भीड़ लगने लगती है। इसके अलावा घर घर भगवान का उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है।