कुशल नेतृत्व क्षमता, ग्राम विकास में नो कम्प्रोमाइज और स्वच्छ भारत की दिशा में शत प्रतिशत शौच मुक्त गांव बनाने वाले जिले के दो सरपंच बुधवार को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मानित होंगे। वे गांव में विकास की गाथा का बखान भी करेंगे। चयनित सरपंचों को जिले की 516 पंचायतों में से चुना गया है।
महिला होने पर लोग नहीं माने, पर अड़ी रही
सिहोदा ग्राम पंचायत की सरपंच मीराबाई ने बताया जब वे चुनी गईं थीं, तब गांव में हर तरफ गंदगी और शराबखोरी हुआ करती थी। मना करने पर लोग अनसुनी कर बहस किया करते थे। पूरी पंचायत को स्वच्छ व सबसे अच्छी बनाने के लिए जिद पकड़ ली और सख्ती के साथ निर्णय लिए, जिसके बाद पूरी पंचायत एक आदर्श बनकर सबके सामने आई। यहां शराब मुक्ति, हर घर में शौचालय, स्वकराधान से राशि एकत्रित की और उसे गांव के विकास में खर्च कर सिहोदा पंचायत को आदर्श पंचायतों में शामिल कर दिया।
विकास योजनाओं पर दिया जोर
बंदरकोला पंचायत के सरपंच अजय लोधी ने पिछड़ी पंचायत का तमगा हटाने की बात अपने शपथ ग्रहण समारोह में कही। जिस पर अजय लोधी अटल रहे और उन्होंने ग्राम विकास योजना के तहत होने वाले सभी कार्यों कार्यों को कागजों से धरातल पर उतार दिया। बंदरकोला एक पिछड़ी पंचायत से अब स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूरी तरह खुले में शौच मुक्त हो चुकी है। साथ ही नेतृत्व क्षमता के चलते गांवों की समस्याएं गांवों में ही हल होने लगी हैं।