उष्णकटिबंधीय वन बरसात में मानसून आने पर अपनी पूरी रंगत में आ जाते है। इसके इतर तितलियां प्रकृति की संदेशवाहक होती है। जिस क्षेत्र में तितलियों की अधिकता होती है, वहां की जैव विविधता सम्पन्न होती है।
Butterfly : जबलपुर मध्य भारत के घने जंगलों से घिरा होने की वजह से हमेशा ही अपने जैव विविधता के लिए जाना जाता हैं। इसके उष्णकटिबंधीय वन बरसात में मानसून आने पर अपनी पूरी रंगत में आ जाते है। इसके इतर तितलियां प्रकृति की संदेशवाहक होती है। जिस क्षेत्र में तितलियों की अधिकता होती है, वहां की जैव विविधता सम्पन्न होती है।
शहर में तितलियों की संख्या अच्छी है, वहीं बारिश के बाद इनकी संख्या में इजाफा हो जाता है। शहर में मानसून थमते ही बटरफ्लाई मड पैडलिंग करके अपना जीवन चक्र बढ़ा रही हैं। अच्छी बात यह है कि शहर में चल रहे बटरफ्लाई सर्वे में लगातार नई तितलियों की संख्या नजर आ रही है।
नेचर कंजर्वेटर डॉ. विजय सिंह यादव ने बताया कि तितलियों का जीवन चक्र मौसम के हिसाब से चलता है। बरसात में जब वायु में नमीं आ जाती है, तो मध्य भारत क्षेत्र में फूलों से परागों से भर जाते हैं। इनमें बड़ी मात्रा में पोषक तत्व और खनिज होते हैं, जिस पर तितलियों पोषक तत्व अवशोषित करती हैं।
एक्सपर्ट का कहना है कि सिटीजन फॉर नेचर एंड सोसायटी के तीन साल पहले किए गए सर्वे में इनकी करीब 130 दर्ज की गई थी। इस बार जून में काफी नमी होने से तितलियां जून के आखिरी सप्ताह से ही काफी मात्रा में देखी जाने लगी थी। जुलाई में तितलियों के दलों को क्षेत्रीय प्रवास करते भी देखा गया। सितंबर खत्म होते तक शहर में चारों ओर तितलियां और क्षेत्रीय जंगली फूलों की बाहर देखने को मिलेगी। इससे तितलियों की संख्या भी बढ़ेगी।
●इस दौरान ब्रीडिंग टाइम बढ़ जाता है
●नवंबर तक इनकी संख्या समान्य होती है
●ठंड बढ़ने पर कुछ सरवाइव नहीं कर पाती, कुछ रह जाती हैं
●बसंत के दौरान पुन: इनकी संख्या खिली हुई नजर आती है
●गर्मी के दौरान यह ड्राई फॉर्म में चली जाती हैं, वहीं मानसून आते ही इनका जीवन चक्र शुरू हो जाता
●इवनिंग ब्राउन
●लाइन बटरफ्लाई
●लाइम बटरफ्लाई
● इंडियन मोरमोन
●प्लेन टाइगर
●ब्लू टाइगर
●ग्लॉसी टाइगर
●कॉमन रोज
●कैबेस व्हाइट
●बैरोनेट
●पिंसी
●यलो टाइगर