जबलपुर

जबलपुर में डिजिटल शिक्षा की बयार, बदल रहा पढ़ाई का अंदाज और क्लासरूम का नजारा

जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में शिक्षा का पारंपरिक स्वरूप तेजी से डिजिटल ढांचे में ढल रहा है। कभी सिर्फ ब्लैकबोर्ड और चौक तक सीमित रहने वाले क्लासरूम अब स्मार्ट बोर्ड और वर्चुअल लैब की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव न केवल छात्रों के पढऩे के तरीके को बदल रहा है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के […]

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Feb 14, 2026
Digital education
  • डिजिटल एजुकेशन, शहर के स्कूलों में क्लासरूम अब स्मार्ट बोर्ड और वर्चुअल लैब की ओर बढ़ रहे
  • बेसिक कोर्स से आईटी ट्रेड तक की लग रहीं क्लास
  • कई कॉलेज भी हो रहे हाईटेक, ई कंटेंट से घर बैठे उपलब्ध करा रहे कोर्स और क्लास

जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में शिक्षा का पारंपरिक स्वरूप तेजी से डिजिटल ढांचे में ढल रहा है। कभी सिर्फ ब्लैकबोर्ड और चौक तक सीमित रहने वाले क्लासरूम अब स्मार्ट बोर्ड और वर्चुअल लैब की ओर बढ़ रहे हैं। यह बदलाव न केवल छात्रों के पढऩे के तरीके को बदल रहा है, बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए उन्हें तैयार भी कर रहा है। स्कूलों से लेकर कॉलेजों तक स्टूडेंट्स को बेसिक और प्रोफेशनल ट्रेनिंग व कोर्स कराए जा रहे हैं।

Digital education demo pic

डिजिटल लाइब्रेरी और स्मार्ट स्कूल बने नई पहचान

शहर की ऐतिहासिक गांधी लाइब्रेरी का डिजिटल होना जबलपुर के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है। आज यहां 40 हजार से अधिक पुस्तकें ई-फॉर्मेट में उपलब्ध हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को घर बैठे संसाधन मिल रहे हैं। इसके साथ ही, जिले के मॉडल हाई, एमएलबी, सांदीपनि स्कूल जैसे सरकारी स्कूलों में डिजिटल बोर्ड और स्मार्ट क्लास से पढ़ाई कराई जा रही है।

Digital education

इसलिए है जरूरत

आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि आज की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए डिजिटल साक्षरता अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य है।

इंटरएक्टिव लर्निंग- अब छात्र केवल किताबों के चित्रों से नहीं, बल्कि एनिमेशन और वीडियो के जरिए जटिल विज्ञान सिद्धांतों को समझ रहे हैं।

कौशल विकास- आईटी लैब्स और कोडिंग की शिक्षा से जबलपुर के छात्र सॉफ्टवेयर और तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए तैयार हो रहे हैं।

संसाधनों की सुलभता- डिजिटल माध्यमों ने शिक्षा को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा है, ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी अब विश्वस्तरीय व्याख्यान ऑनलाइन सुन पा रहे हैं।

चुनौतियां और भविष्य की राह

हालांकि, यह सफर इतना आसान नहीं है। जिले के कई स्कूलों में अभी भी आईटी लैब्स का निर्माण अधूरा है। जिले के हजार छात्रों तक अब भी तकनीकी लाभ पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है। हालांकि पीएम श्री योजना और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हर छात्र को टैबलेट और इंटरनेट से जोडऩे के प्रयास किए जा रहे हैं।

स्कूल में बेसिक से लेकर आईटी ट्रेड तक की पढ़ाई

सांदीपनि स्कूल अधारताल के प्राचार्य प्रकाश कुमार पालीवाल ने बताया कक्षा 6 से 8वीं तक के बच्चों को कम्पयूटर शिक्षा अनिवार्य रूप से दे रहे हैं। प्रतिदिन उनकी क्लास लग रही हैं। आईसीटी लैब के माध्यम से कक्षा 9 से 12वीं तक के बच्चों को प्रेक्टिल, अन्य तकनीकि कार्यों को सिखाया जा रहा है। वोकेशनल शिक्षा के तहत आईटी ट्रेड उपलब्ध है। इसमें कक्षा 9 से 12 वीं तक के बच्चों को आईटी ट्रेड के विषयों की पढ़ाई कराई जा रही है। बच्चे की रुचि के अनुसार उसे विषय दिया जा रहा है। स्मार्ट बोर्ड, स्मार्ट क्लास भी लग रही हैं। जिनके माध्यम बच्चों को डिजिटल एजुकेशन के महत्व से अवगत कराया जा रहा है।

पीएम श्री योजना के अंतर्गत डिजिटल एजुकेशन को सबसे ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है। महाकोशल कॉलेज में ई कंटेंट रिसोर्स सेंटर भी खुल गया है। जिसके माध्यम से विषय विशेषज्ञ अपने वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं। जो कि छात्रों को घर बैठे पूरा कोर्स और क्लास उपलब्ध हो रही है। खासकर ब्लाइंड बच्चों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिल रहा है। डिजिटल एजुकेशन बड़ा फायदा ये है कि इससे महंगी किताबों का बोझ खत्म हो रहा है। भविष्य के लिए डिजिटल एजुकेशन बहुत जरूरी हो गया है। जिसकी शुरुआत हो चुकी है।

  • डॉ. अरुण शुक्ला, संभागीय नोडल अधिकारी, स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन योजना
Published on:
14 Feb 2026 12:19 pm
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