
जबलपुर। डुमना और उसके आसपास की हरियाली को प्रशासन जबलपुर की बड़ी सम्पत्ति बताता रहा है। अब यही जमीन विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए आवंटित की जा रही है। राजस्व रेकार्ड के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कई प्रोजेक्ट्स के लिए डुमना व उससे लगे महगवां, चकदेही, गधेरी गांवों में कई सौ एकड़ जमीन आवंटित की गई है। इनमें से कुछ प्रोजेक्ट में कांक्रीट के ढांचे तैयार हो गए हैं, जबकि कुछ में निर्माण कार्य जारी है। कई विकास कार्यों के लिए जमीन दिया जाना प्रस्तावित है। शहर के पर्यावरणविदों का मानना है कि नगर विकास के लिए आधारभूत ढांचे का निर्माण आवश्यक है, लेकिन ग्रीन बेल्ट को सुरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
375 एकड़ से ज्यादा में तीन संस्थान
डुमना क्षेत्र में तीन संस्थानों को 375 एकड़ से अधिक जमीन दी गई है। इनमें से ट्रिपलआइटीडीएम और फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट बनकर तैयार हो गए हैं। इनका संचालन भी हो रहा है। संस्थानों ने एकेडमिक भवन और हॉस्टल भी बनाए हैं। विधि विश्वविद्यालय को भी करीब 125 एकड़ जमीन दी गई है, जिसका निर्माण होना है।
इन्हें भी दी जमीन
राजस्व विभाग ने डुमना में जजों के बंगले, लोकायुक्त, प्रदेश शासन के सूचना व प्रौद्योगिकी विभाग और एयरपोर्ट के विस्तार के लिए भी जमीन का आवंटन किया है। रेलवे को स्पोट्र्स सिटी निर्माण के लिए भी जमीन का आवंटन प्रस्तावित है।
शहर का विकास आवश्यक है, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए जमीन की भी आवश्यकता होती है। लेकिन, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ग्रीन बेल्ट सुरक्षित रहे। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में वन्य जीव हैं। जंगल के साथ चरनोई जमीन को भी संरक्षित किया जाना चाहिए।
- एबी मिश्रा, पर्यावरणविद्