
कटनी/जबलपुर। तुझे लगे चोट तो दर्द मुझे होए...। इन पंक्तियों की तरह ही एक अजीब मामला शुक्रवार कटनी के जिला अस्पताल में सामने आया। दरअसल चाचा की मारपीट से घायल हुई 10 साल की गीता को यहां लाया गया। उसका इलाज चल ही रहा था कि परिजन पीछे से उसकी जुड़वा बहन सीता को लेकर अस्पताल पहुंच गए। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक तब हैरान रह गए जब परिजनों ने बताया कि गीता और सीता के साथ अक्सर ऐसा ही होता है। यदि गीता को चोट लगती है तो सीता को भी दर्द होने लगता है। सीता को कोई बीमारी होती है, तो गीता भी अपने आप बीमार हो जाती है। दो जिस्म मगर एक जान की तरह उन्हें हंसी और नींद भी लगभग एक साथ ही आती है। इस अजीब संयोग को लोग कुदरत का करिश्मा मान रहे हैं, वहीं चिकित्सकों और मनोवैज्ञानिकों के अपने अलग तर्क हैं। उनका कहना है कि यह मामला साइकोलॉजी से जुड़ा है। जुड़वा फिल्म की कहानी की तर्ज पर यह रोचक संयोग हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है।
चाचा ने की मारपीट
प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर के अमीरगंज निवासी सुनीता चौधरी अपनी 10 वर्षीय बेटी गीता को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची। गीता बिल्कुल अचेत जैसी थी और उसके शरीर में कई जगह चोटों के निशान थे। सुनीता ने बताया कि किसी कारण से गीता के साथ पड़ोस में ही रहने वाले उसके रिश्ते के चाचा राजा चौधरी मारपीट की है। बच्ची की हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ट्रॉमा यूनिट में भर्ती कर लिया।
जुड़वा सीता भी हुई बेहोश
प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार अस्प्ताल में गीता का उपचार शुरू ही हुआ था कि परिवार के लोग उसकी जुड़वा बहन सीता को भी अर्ध बेहोशी की हालत में लेकर अस्पताल आ गए और उसे भी भर्ती करा दिया। डॉक्टर तब हैरान रह गए जब सुनीता ने बताया कि गीता और सीता जुड़वा बहनें हैं। दोनों के साथ अक्सर ऐसा ही होता है। गीता को चोट लगती है तो सीता भी दर्द से बेचैन हो जाती है। इस अजब संयोग के बारे में सुनकर डॉक्टर हैरान रह गए। उन्होंने जल्द सीता का भी इलाज किया। अब दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। लोग इसे कुदरत का करिश्मा मान रहे हैं। वहीं डॉ. एसके शर्मा का कहना है कि जुड़वा होने की वजह से लोगों में भ्रम की स्थिति है।
दोनों को एक साथ लगती है भूख
सीता और गीता की हर आदत लगभग एक जैसी है। मां सुनीता, पिता शिवचरुण चौधरी, पड़ोसी राकेश व अन्य स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि सीता को भूख लगती है तो गीता को भी लगती है। गीता को नींद आती है तो सीता भी सोने लगती है। इन दोनों बहनों का चेहरा भी लगभग मिलता जुलता है। शुक्रवार सुबह सीता को नींद आ गई और देखते ही देखते गीता भी सो गई। गीती और सीता ने भी भोली जुबान से बताया कि किसी भी एक बहन को चोट लगने पर दूसरी दर्द होने लगता है। हंसी भी एक साथ आती है। उनके रोचक अनुभव सुनने के लिए भीड़ लगी रही। बताया गया है कि यदि बहनें रिश्तेदारी में अलग-अलग भी रहती हैं तब भी हरकतें एक जैसी होती हैं। गीता ने बताया कि उनके माता-पिता मजदूरी करते हैं और दोनों को बहुत प्यार करते हैं।
एक्सपर्ट ब्यू... इसलिए होता है ऐसा
तिलक कॉलेज में पदस्थ मनोविज्ञान और समाजशास्त्र के प्रोफेसर एसबी भारद्वाज का कहना है कि यह घटना पूरी तरह मनोवैज्ञानिक है। अक्सर देखने में आया है कि ट्वींस के टिश्यू लगभग एक समान होते हैं। एक टिश्यू की हरकत से दूसरे पर तत्काल असर होता है। अनुवांशिक रूप से हृदय की धमनियां एक जैसी चलतीं हैं। एक को यदि कष्ट होता है तो दूसरे को भी कष्ट होता है। खुशी भी एक साथ दोनों को होगी। यदि बीमारी एक को है तो दूसरे को भी होना संभव है। इनकी शरीर के अंग, प्रत्यंग, हृदय, रक्त सहित तरंगें भी एक दूसरे से मिलती-जुलती हैं। इस प्रभाव एक उम्र के बाद समाप्त भी हो जाता है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
जब जन्म से ही बच्चों का शरीर आपस में जुड़ा रहता है, तो इस तरह की शिकायत व स्थिति सामान्य बात है। यदि जन्म के समय शरीर अलग-अलग रहता है तो प्राय: ऐसा नहीं होता। यह जांच का विषय है।
डॉ. एसपी सोनी, प्रभारी सिविल सर्जन, जिला अस्पताल
जुड़वा बच्चों में यदि एक साथ एक जैसी प्रतिक्रिया करने या देने की आदत नजर आए तो इसे साइको सोमेटिक डिसाडर्ड कहा जाता है। इसकी विशेषज्ञ चिकित्सकों से जांच कराकर उचित इलाज करना चाहिए। ऐसा रेयर केस में ही होता है।
डॉ. अशोक चौदहा, सेवा निवृत्त सीएमएचओ, चाइल्ड स्पेशलिस्ट