fake doctor : थ्री इडियट्स में जिस तरह जावेद जाफरी फर्जी डिग्री पर ठेकेदारी करता रहा, कुछ इसी तरह का मामला मार्बल सिटी अस्पताल में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर का है।
fake doctor : थ्री इडियट्स में जिस तरह जावेद जाफरी फर्जी डिग्री पर ठेकेदारी करता रहा, कुछ इसी तरह का मामला मार्बल सिटी अस्पताल में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर का है। मार्बल सिटी अस्पताल में डॉ. बृजराज सिंह उइके बनकर नौकरी करने वाला असल में सतेंद्र निकला। वह ओबीसी कैटेगरी का है, लेकिन एमबीबीएस करने के लिए एसटी आरक्षण के फायदे की खातिर उसने फर्जीवाड़े को अंजाम दे दिया। सतेन्द्र ने दोस्त बृजराज उइके के दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस की डिग्री हासिल भी कर ली। नौकरी भी करने लगा। मामले में एफआइआर होने के बाद ओमती पुलिस ने जांच की, तो यह खुलासा हुआ है।
मार्बल सिटी अस्पताल में काम करने वाले फर्जी डॉक्टर को तलाश रही पुलिस
एसटी आरक्षण का लाभ लेने वाला फर्जी डॉक्टर बेनकाब
सतेंद्र ओबीसी कैटेगरी का है। उसे एमबीबीएस करना था, लेकिन ओबीसी कैटगरी में सीट कम होने के कारण उसने अपने दोस्त कटनी निवासी एसटी कैटेगरी के मित्र बृजराज उइके के नाम का इस्तेमाल किया। पुलिस फिलहाल सतेंद्र की तलाश कर रही है। लेकिन, उसका फोन लगातार बंद आ रहा है।
थ्री इडियट्स फिल्म में जिस तरह आमिर खान अपने मालिक के पुत्र रणछोड़दास के दस्तावेजों पर पढ़ाई करता रहा और डिग्री हासिल कर ली। इसी तरह सतेन्द्र ने बृजराज के दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल में दाखिला लिया और एमबीबीएस की डिग्री ली। उसकी अंकसूची में अपनी तस्वीर लगाई और वर्ष 2011 में एमबीबीएस में बृजराज बनकर दाखिला लिया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने डॉ. बृजराज बनकर ही नौकरी भी शुरू कर दी।
● आरोपी सतेंद्र है ओबीसी कैटेगरी का
● एसटी कैटेगरी के दोस्त की अंकसूची में लगाई तस्वीर
● फर्जी दस्तावेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की
● उसी डिग्री से नौकरी भी करने लगा
रेलवे सौरभ ऑफीसर्स कॉलोनी निवासी मनोज कुमार महावर की मां शाति देवी की मार्बल सिटी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मनोज ने मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस से शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी मां का इलाज किस डॉक्टर ने किया था, यह पता नहीं चल रहा। अस्पताल के बोर्ड में जिस डॉ. बृजराज सिंह उइके का नाम लिखा है, वह तो कोई और ही है। मनोज ने जानकारी जुटानी शुरू की, तो खुलासा हुआ कि असल में बृजलाल डॉक्टर नहीं पेंटर है। जो फोटो अस्पताल के डॉक्टर्स बोर्ड पर लगी थी, वह उसके दोस्त सतेंद्र की है।
fake doctor : सतेंद्र ने एसटी कैटेगिरी का फायदा उठाने के लिए कटनी निवासी पेंटर अपने दोस्त बृजलाल के नाम और उसकी अंकसूची का इस्तेमाल किया। अस्पताल प्रबंधन की गड़बड़ी मिली, तो उस पर भी कार्रवाई होगी।