Free cancer treatment मेडिकल अस्पताल के पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड में सालभर में कैंसर पीड़ित पौने दो सौ से ज्यादा बच्चे पहुंचे हैं।
Free cancer treatment : बच्चे भी बड़ी संख्या में कैंसर की घातक बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। मेडिकल अस्पताल के पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड में सालभर में कैंसर पीड़ित पौने दो सौ से ज्यादा बच्चे पहुंचे हैं। इनमें इलाज कराने वाले बच्चों में सबसे बड़ी संख्या ब्लड कैंसर के मरीजों की है। खास बात तो ये नियमित रूप से इलाज करा रहे बच्चों में से 2 की ब्लड कैंसर की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो गई है।
पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड के विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि कैंसर पीड़ित बच्चों की कीमोथैरेपी से लेकर इम्युनो थैरेपी 6 महीने से लेकर दो साल तक चलती है। आवश्यक है कि परिजन इलाज अधूरा न छोड़ें जिससे बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हो सके।
01 साल पहले हुई थी शुरुआत 180 कैंसर पीड़ित मरीज बच्चे आए अब तक 138 कैंसर पीड़ित बच्चों ने शुरू कराया इलाज 92 बच्चे ब्लड कैंसर पीड़ित 46 बच्चे अन्य प्रकार के कैंसर से पीड़ित 38 बच्चे नियमित इलाज के साथ ही फॉलोअप करा रहे 30 बच्चे ड्रॉपआउट 02 बच्चे ब्लड कैंसर से पीड़ित, इलाज के बाद पूरी तरह हुए ठीक
17 साल का युवक ब्लड कैंसर से पीड़ित था। उसका नियमित इलाज चला। समय पर फॉलोअप भी जारी रखा गया अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है।
डेढ़ साल की बच्ची को जब इलाज के लिए पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड लाया गया तो जांच में पता लगा कि उसे ब्लड कैंसर है, इसके साथ ही वह डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है। इसके हार्ट में छेद भी था। उसकी दोनों बीमारियों का इलाज चला, अब वह स्वस्थ है।
मेडिकल अस्पताल में एक साल पहले पीडियाट्रिक कैंसर वार्ड शुरू किया गया था। बच्चों के कैंसर की जांच व इलाज महंगा है, जो आयुष्मान योजना के दायरे में भी शामिल नहीं है। ऐसे में बच्चों में कैंसर की जांच व इलाज नि:शुल्क इलाज हो सके इसके लिए मेडिकल अस्पताल प्रशासन ने एक एनजीओ को जोड़ा। ये एनजीओ टाटा मेमोरियल जैसे अस्पतालों से जुड़ा हुआ है। इस एनजीओ की मदद से बच्चों में कैंसर की नि:शुल्क जांच व इलाज शुरू हो गया। बच्चों को दिया जाने वाला पौष्टिक और इम्युनिटी बूस्ट करने वाला आहार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
Free cancer treatment : बच्चों में कैंसर की बीमारी का समय पर पता लग जाने और नियमित इलाज के साथ फॉलोअप लेने से बड़ी संख्या में बच्चे स्वस्थ हो रहे हैं। लेकिन कई परिजन झाडफ़ूंक के चक्कर में इलाज अधूरा छोड़ देते है।